मानसून सत्र के दौरान, भारतीय संसद में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति से संबंधित टिप्पणी पर हंगामा हुआ। यह घटना संसद के सत्र के दौरान हुई, जब खरगे ने अपने बयान में मनुस्मृति का उल्लेख किया। इस टिप्पणी के बाद सदन में तीखी प्रतिक्रिया हुई, जिससे कार्यवाही बाधित हुई।
खरगे की टिप्पणी के बाद सदन में उपस्थित सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। बाद में, इस बयान का एक हिस्सा रिकॉर्ड से हटा दिया गया, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।
इस घटना के पीछे का संदर्भ यह है कि मनुस्मृति भारतीय समाज में एक विवादास्पद ग्रंथ है, जिसे कई लोग जातिवाद और भेदभाव का प्रतीक मानते हैं। खरगे की टिप्पणी ने इस मुद्दे को फिर से ताजा कर दिया है, जिससे राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और बढ़ गए हैं।
इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संसद में हंगामे के बाद राजनीतिक नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की है।
इस घटना का आम लोगों पर प्रभाव पड़ा है, क्योंकि यह राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर रहा है। लोग इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं और इसे सामाजिक न्याय के संदर्भ में देख रहे हैं।
इससे पहले भी मनुस्मृति को लेकर कई बार विवाद उठ चुके हैं, लेकिन इस बार का हंगामा विशेष रूप से संसद में हुआ है। इससे राजनीतिक दलों के बीच की खाई और गहरी हो सकती है।
आगे क्या होगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। संसद में इस मुद्दे पर आगे की चर्चा और संभावित निर्णयों का इंतजार है। राजनीतिक दलों के बीच संवाद और सहमति की आवश्यकता बढ़ गई है।
इस घटना ने एक बार फिर से मनुस्मृति और उसके सामाजिक प्रभावों को उजागर किया है। यह न केवल संसद के भीतर, बल्कि समाज में भी महत्वपूर्ण चर्चाओं का विषय बन गया है।





