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पप्पू यादव पर संत समाज ने दर्ज कराया मुकदमा

संत समाज ने सांसद पप्पू यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। यह कार्रवाई पातालपुरी मठ के महंत बालक दास के नेतृत्व में की गई। संतों का आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने चंदा चोरी का स्वांग रचा।

1 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर महंत बालक दास के नेतृत्व में संत समाज का एक प्रतिनिधि मंडल कोतवाली थाने पहुंचा। उन्होंने सांसद पप्पू यादव समेत प्रदर्शन में शामिल अन्य नेताओं के खिलाफ तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की। यह घटना हाल ही में हुई, जब संतों ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई।

संत समाज का आरोप है कि सांसद पप्पू यादव और अन्य नेताओं ने एक प्रदर्शन के दौरान चंदा चोरी का स्वांग रचा। उन्होंने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं और संतों का कहना है कि यह उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। संत समाज ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

इस घटना का एक पृष्ठभूमि है, जिसमें संत समाज ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कई बार आवाज उठाई है। पप्पू यादव का नाम पहले भी विभिन्न विवादों में आ चुका है, लेकिन इस बार संतों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। संतों का मानना है कि इस प्रकार के आचरण से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

महंत बालक दास ने कहा कि संत समाज को इस प्रकार के व्यवहार का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की है। संतों का यह कदम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

इस घटना का प्रभाव संत समाज के बीच गहरा है। संतों ने इस मामले को लेकर एकजुटता दिखाई है और अपने अधिकारों के लिए लड़ने का संकल्प लिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि संत समाज अब अपने अधिकारों के प्रति सजग है।

इस बीच, संत समाज ने अन्य धार्मिक संगठनों से भी समर्थन मांगा है। उन्होंने कहा है कि इस मुद्दे पर सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। इससे पहले भी संतों ने विभिन्न मुद्दों पर एकजुटता दिखाई है।

आगे की कार्रवाई में संत समाज ने पुलिस से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि उनके खिलाफ कोई अन्य कार्रवाई न हो। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे और भी सख्त कदम उठा सकते हैं।

इस घटना का महत्व इस बात में है कि यह संत समाज की एकजुटता और उनके अधिकारों के प्रति सजगता को दर्शाता है। यह घटना धार्मिक समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। संत समाज का यह कदम उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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