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फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध

राज्यसभा में JDU सांसद संजय झा ने फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किया। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इसे नवीनीकरण न किया जाए। यह मामला बांग्लादेश के साथ जल संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा है।

7 अगस्त 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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राज्यसभा में बांग्लादेश के साथ फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किया गया। यह घटना हाल ही में हुई, जब जनतादल (यूनाइटेड) के सांसद संजय झा ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस संधि का नवीनीकरण न किया जाए।

संजय झा ने कहा कि यह संधि भारत के जल संसाधनों के लिए हानिकारक हो सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश के साथ जल संधि के नवीनीकरण से भारत के हितों को खतरा हो सकता है। उनके अनुसार, यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जल सुरक्षा का भी है।

फरक्का जल संधि का इतिहास काफी पुराना है, जो भारत और बांग्लादेश के बीच जल वितरण को लेकर है। यह संधि 1996 में हस्ताक्षरित की गई थी और इसका उद्देश्य गंगा नदी के जल का उचित वितरण सुनिश्चित करना था। इस संधि के अंतर्गत बांग्लादेश को गंगा के पानी की एक निश्चित मात्रा दी जाती है।

इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है। हालांकि, सांसद संजय झा की अपील ने इस विषय को फिर से चर्चा में ला दिया है। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।

इस विवाद का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां जल संकट की समस्या है। यदि संधि का नवीनीकरण नहीं होता है, तो इससे जल आपूर्ति में बदलाव आ सकता है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में जल संकट और बढ़ सकता है।

इस मुद्दे से संबंधित अन्य विकासों में जल संसाधनों के प्रबंधन पर चर्चा शामिल है। सांसद झा ने इस बात पर भी जोर दिया कि जल संसाधनों का सही प्रबंधन आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को एक साथ आकर काम करने की आवश्यकता है।

आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेती है। यदि सरकार संधि का नवीनीकरण नहीं करती है, तो इससे बांग्लादेश के साथ संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, जल संकट की स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।

इस प्रकार, फरक्का जल संधि का नवीनीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। यह न केवल भारत और बांग्लादेश के बीच जल संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि जल सुरक्षा के मुद्दे पर भी गहरा असर डालेगा। सांसद संजय झा की अपील ने इस विषय को फिर से महत्वपूर्ण बना दिया है।

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