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उद्धव ठाकरे ने भागवत पर साधा निशाना

उद्धव ठाकरे ने भागवत से सवाल किया कि लाठी खाने वालों से क्यों नहीं मिले। उन्होंने मुंबई में संघ-Gen Z संवाद पर भी सवाल उठाए। यह बयान NEET विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आया है।

7 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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मुंबई में हाल ही में आयोजित संघ-Gen Z संवाद के दौरान शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। उन्होंने भागवत से यह सवाल किया कि लाठी खाने वालों से वे क्यों नहीं मिले। यह घटना उस समय हुई जब देश में NEET परीक्षा के खिलाफ छात्रों का विरोध जारी है।

उद्धव ठाकरे ने अपने बयान में यह भी कहा कि भागवत को उन छात्रों से मिलना चाहिए जो लाठीचार्ज का शिकार हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संघ का यह संवाद केवल एक दिखावा है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। ठाकरे ने इस संवाद को लेकर चिंता जताई कि यह छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है।

NEET परीक्षा के खिलाफ छात्रों का आंदोलन पिछले कुछ समय से चल रहा है। इस आंदोलन में छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर कई बार प्रदर्शन किए हैं। ठाकरे का यह बयान इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह छात्रों की आवाज को उठाने का एक प्रयास है।

हालांकि, इस मामले पर संघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भागवत ने इस संवाद में भाग लिया, लेकिन उन्होंने ठाकरे के सवालों का जवाब नहीं दिया। यह चुप्पी कई सवाल उठाती है कि संघ इस मुद्दे पर क्या सोचता है।

इस विवाद का सीधा असर छात्रों पर पड़ रहा है, जो NEET परीक्षा को लेकर चिंतित हैं। छात्रों का मानना है कि उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ठाकरे के बयान ने इस आंदोलन को और अधिक प्रमुखता दी है और छात्रों के बीच एकजुटता को बढ़ावा दिया है।

इस घटना के बाद, छात्रों के आंदोलन में और तेजी आने की संभावना है। ठाकरे के बयान ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि संघ और सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

आगे की स्थिति में, छात्रों के आंदोलन के और बढ़ने की संभावना है। यदि संघ और सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है। छात्रों की आवाज को अनसुना करना उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों के मुद्दे महत्वपूर्ण हैं और उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। उद्धव ठाकरे का बयान इस बात का संकेत है कि राजनीतिक नेता भी छात्रों की समस्याओं को लेकर सजग हैं। यह घटना आने वाले समय में छात्रों के आंदोलन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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