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आसियान दिवस पर कुतुब मीनार का ऐतिहासिक प्रकाशन

आसियान दिवस के अवसर पर कुतुब मीनार को रोशन किया गया। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-आसियान संबंधों की गहराई पर प्रकाश डाला। यह आयोजन 59वें आसियान दिवस के तहत आयोजित किया गया।

8 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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आसियान दिवस के अवसर पर 8 अगस्त 2023 को कुतुब मीनार पर एक ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला। इस दिन कुतुब मीनार को विशेष रूप से रोशन किया गया। यह आयोजन भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था।

इस कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भाग लिया और आसियान देशों के साथ भारत के संबंधों की गहराई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत साझेदारी और भी मजबूत हो रही है। कुतुब मीनार की रोशनी ने इस अवसर को और भी खास बना दिया।

भारत और आसियान देशों के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। आसियान का गठन 1967 में हुआ था, और तब से ही भारत ने इस संगठन के साथ अपने संबंधों को विकसित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। आसियान देशों के साथ व्यापार, संस्कृति और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत ने कई पहल की हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने इस अवसर पर कहा कि भारत और आसियान के बीच संबंधों को और गहरा करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस आयोजन का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुतुब मीनार की रोशनी ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को आकर्षित किया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है, बल्कि भारत और आसियान के बीच संबंधों को भी मजबूत करता है।

आसियान दिवस के इस आयोजन के बाद, भारत और आसियान देशों के बीच और भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और बढ़ावा दिया जाएगा।

आगे की योजना के तहत, भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की जा सकती है। इससे दोनों पक्षों के बीच संबंधों में और मजबूती आएगी।

इस आयोजन का महत्व न केवल सांस्कृतिक है, बल्कि यह भारत और आसियान के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाता है। कुतुब मीनार पर किया गया यह प्रकाशन एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जो भविष्य में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और बढ़ाने में सहायक होगा।

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