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जेएनयू में उमर खालिद की पुस्तक पर तनाव

जेएनयू में उमर खालिद की पुस्तक पर परिचर्चा के दौरान तनाव बढ़ा। एबीवीपी और छात्र संघ के बीच टकराव हुआ। कार्यक्रम बिना अनुमति के आयोजित किया गया।

10 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में 18 अक्टूबर 2023 को पूर्व छात्र उमर खालिद की पुस्तक पर परिचर्चा के दौरान तनाव उत्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) और छात्र संघ के बीच टकराव की स्थिति बनी। यह घटना विश्वविद्यालय के परिसर में हुई, जहां छात्रों ने 'उमर खालिद को रिहा करो' के नारे लगाए।

कार्यक्रम का आयोजन बिना अनुमति के किया गया था, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। एबीवीपी के सदस्यों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया और इसे अव्यवस्थित बताया। छात्र संघ ने इस कार्यक्रम को स्वतंत्रता के अधिकार के तहत आयोजित करने का दावा किया। इस टकराव के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।

उमर खालिद, जो जेएनयू के पूर्व छात्र हैं, को 2016 में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी पुस्तक पर चर्चा का उद्देश्य उनके विचारों और अनुभवों को साझा करना था। जेएनयू में इस प्रकार के कार्यक्रम अक्सर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित किए जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

इस घटना पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विश्वविद्यालय के कुछ सदस्यों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों की अनुमति को लेकर चिंता जताई है। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि छात्र संघ बिना अनुमति के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है।

इस तनाव का प्रभाव छात्रों पर पड़ा है, जो इस घटना को लेकर चिंतित हैं। कई छात्रों ने इस टकराव को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल के लिए हानिकारक बताया है। कुछ छात्रों ने इस घटना को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के रूप में देखा है।

इस घटना के बाद, जेएनयू में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाने की संभावना है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, छात्रों के बीच संवाद और सहिष्णुता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

आगे की कार्रवाई में, विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना की जांच करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों। छात्र संघ और एबीवीपी के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की जा सकती है। इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।

इस घटना ने जेएनयू के शैक्षणिक माहौल में तनाव को उजागर किया है। यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय में राजनीतिक विचारों के प्रति सहिष्णुता की आवश्यकता है। इस प्रकार की घटनाएँ छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख हो सकती हैं कि कैसे वे अपने विचारों को व्यक्त करें और दूसरों के विचारों का सम्मान करें।

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