गुरुवार, 13 अगस्त 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
भारत

सीबीएसई परीक्षा विभाग में 44% पद खाली, गड़बड़ी का खतरा

सीबीएसई परीक्षा विभाग में 44% पद खाली हैं। संसद की समिति ने इस स्थिति को गंभीर बताया है। ठेके पर काम करने की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं।

13 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
WXfT

सीबीएसई परीक्षा विभाग में 44% पद खाली हैं, जिससे परीक्षा संचालन में गड़बड़ी का खतरा बढ़ गया है। यह जानकारी हाल ही में संसद की एक समिति द्वारा सामने आई है। समिति ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

परीक्षा विभाग में खाली पदों की संख्या ने शिक्षा प्रणाली में स्थिरता को प्रभावित किया है। समिति ने बताया कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसके अलावा, परीक्षा के संचालन में देरी और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

सीबीएसई, जो कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड है, का मुख्य कार्य परीक्षा आयोजित करना और परिणाम घोषित करना है। लेकिन, इस समय विभाग में कर्मचारियों की कमी के कारण कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न हो रही है। यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

संसद की समिति ने इस मुद्दे पर एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो परीक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। समिति ने अधिकारियों से यह भी पूछा है कि वे इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।

इस स्थिति का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है, जो परीक्षा के लिए तैयारी कर रहे हैं। यदि परीक्षा संचालन में गड़बड़ी होती है, तो इससे छात्रों का मनोबल टूट सकता है। इसके अलावा, परीक्षा परिणामों में भी अनियमितता की आशंका है।

इससे पहले भी सीबीएसई में कर्मचारियों की कमी की समस्या उठ चुकी है, लेकिन इस बार स्थिति अधिक गंभीर है। समिति ने सुझाव दिया है कि ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की विश्वसनीयता पर पुनर्विचार किया जाए। इससे पहले, ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

आगे की कार्रवाई के लिए समिति ने सीबीएसई से एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें खाली पदों की संख्या और उनकी भरपाई के लिए उठाए गए कदमों का विवरण हो। इसके अलावा, समिति ने यह भी कहा है कि यदि आवश्यक हो, तो वे इस मुद्दे पर और भी सुनवाई करेंगे।

इस स्थिति का महत्व इसलिए है क्योंकि यह न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है, बल्कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है। सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इससे शिक्षा क्षेत्र में और भी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

टैग:
सीबीएसईपरीक्षासंसदशिक्षा
WXfT

भारत की और ख़बरें

और पढ़ें →