छत्तीसगढ़ में 20 अगस्त को हरेली तिहार का आयोजन धूमधाम से किया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि यंत्रों की पूजा की। यह पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का प्रतीक है और इसे हर साल मनाया जाता है।
हरेली तिहार का आयोजन मुख्यतः कृषि कार्यों की शुरुआत के समय किया जाता है। इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और फसल की अच्छी पैदावार की कामना करते हैं। इस पर्व के दौरान लोग पारंपरिक गीत गाते हैं और नृत्य करते हैं, जिससे वातावरण में उत्साह का संचार होता है।
छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार का इतिहास बहुत पुराना है और यह पर्व कृषि से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों का हिस्सा है। यह पर्व विशेष रूप से वर्षा ऋतु के दौरान मनाया जाता है, जब किसान अपने खेतों में नई फसल की बुवाई करते हैं। हरेली तिहार का आयोजन कृषि समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कृषि यंत्रों की पूजा से किसानों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कृषि के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बघेल ने यह भी कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
हरेली तिहार का आयोजन लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यह पर्व किसानों को अपने काम के प्रति उत्साहित करता है और उन्हें अपनी मेहनत का फल देखने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन लोग एकत्रित होकर एक-दूसरे के साथ खुशियाँ बाँटते हैं।
इस पर्व के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय कलाकारों द्वारा नृत्य और संगीत प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिससे पर्व का आनंद और बढ़ जाता है। हरेली तिहार के दौरान स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ जाती है।
आगे चलकर, यह पर्व हर साल की तरह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बना रहेगा। कृषि कार्यों की शुरुआत के साथ-साथ, यह पर्व सामाजिक एकता और सामूहिकता को भी बढ़ावा देता है। आने वाले समय में इस पर्व के आयोजन को और भव्य बनाने की योजनाएँ बनाई जा सकती हैं।
इस प्रकार, हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व न केवल कृषि के प्रति सम्मान व्यक्त करता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देता है। हरेली तिहार का आयोजन हर साल किसानों और स्थानीय लोगों के लिए एक विशेष महत्व रखता है।
