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विभाजन विभीषिका दिवस पर पीएम मोदी का भावुक बयान

प्रधानमंत्री मोदी ने विभाजन विभीषिका दिवस पर बंटवारे के जख्मों को याद किया। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों ने अपनों से बिछड़ने के बाद भी जिंदगी को फिर से खड़ा किया। यह दिन बंटवारे के दर्द को याद करने का है।

14 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंटवारे के जख्मों को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया। यह दिवस हर वर्ष 14 अगस्त को मनाया जाता है, जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हुए दर्दनाक अनुभवों को स्मरण करने के लिए समर्पित है। इस दिन, पीएम मोदी ने उन लाखों लोगों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने अपने प्रियजनों से बिछड़ने के बाद भी अपनी जिंदगी को फिर से खड़ा किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि विभाजन के समय लाखों लोगों ने अपने परिवारों को खोया और उन्हें नए सिरे से जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि यह दिन हमें उन सभी लोगों के बलिदानों को याद करने का अवसर प्रदान करता है, जिन्होंने विभाजन के दौरान कठिनाइयों का सामना किया। मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि यह दिन हमें एकजुट रहने और अपने इतिहास को समझने की प्रेरणा देता है।

भारत का विभाजन 1947 में हुआ, जब देश को दो भागों में बांटा गया - भारत और पाकिस्तान। इस विभाजन के दौरान लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए और कई परिवार बिछड़ गए। यह घटना भारतीय इतिहास में एक गहरे जख्म के रूप में जानी जाती है, जिसने समाज पर गहरा प्रभाव डाला। विभाजन के समय हुई हिंसा और विस्थापन ने लोगों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों के संघर्षों को याद करना चाहिए और उनके बलिदानों को सम्मान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें एकजुट रहकर अपने समाज को मजबूत बनाना चाहिए। मोदी ने कहा कि यह दिन हमें एक नई दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

विभाजन विभीषिका दिवस का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह दिन उन सभी लोगों के लिए एक स्मृति है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने प्रियजनों को खोया। समाज में इस दिन को लेकर जागरूकता बढ़ी है और लोग अपने इतिहास को समझने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

इस दिन के साथ-साथ, विभाजन के अनुभवों को साझा करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और संगोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं। लोग अपने परिवारों के इतिहास को साझा करते हैं और विभाजन के समय की कहानियों को सुनाते हैं। यह प्रक्रिया न केवल स्मृति को जीवित रखती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी जागरूक करती है।

आगे बढ़ते हुए, इस दिवस के महत्व को समझते हुए, सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय स्मृति दिवस के रूप में मान्यता दी है। इससे लोगों को अपने इतिहास के प्रति जागरूक करने और समाज में एकता को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। यह दिन भविष्य में भी महत्वपूर्ण रहेगा।

विभाजन विभीषिका दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह हमें अपने अतीत को समझने और एकजुट रहने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान ने इस दिन के महत्व को और भी बढ़ा दिया है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें अपने इतिहास से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

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