कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में नए संसद भवन की आलोचना की है। उन्होंने इसे 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' करार दिया और कहा कि इसमें वह अपनापन नहीं है जो पुरानी इमारत में था। यह बयान उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया।
थरूर ने कहा कि नए संसद भवन में अंतरंगता की कमी है और यह केवल एक औपचारिक स्थान के रूप में कार्य करता है। उन्होंने पुरानी संसद भवन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की वास्तुकला और माहौल में एक अलग तरह का अपनापन था। उनके अनुसार, नए भवन में यह गुण नहीं हैं।
भारत की संसद का नया भवन 2020 में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद 2023 में पूरा हुआ था। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस है, लेकिन थरूर का मानना है कि इसकी डिजाइन और माहौल में कमी है। पुरानी संसद भवन का निर्माण 1927 में हुआ था और यह भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक रहा है।
इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान नहीं आया है। हालांकि, थरूर के बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। उनके विचारों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएँ आ सकती हैं।
थरूर के बयान का आम लोगों पर प्रभाव पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो पुरानी संसद भवन के प्रति भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं। नए भवन की आलोचना से यह भी संकेत मिलता है कि कुछ लोग बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
इस बीच, नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद से कई राजनीतिक गतिविधियाँ और चर्चाएँ जारी हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं और इससे संबंधित मुद्दों पर बहस हो रही है।
आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या अन्य नेता भी थरूर की तरह नए संसद भवन की आलोचना करेंगे या इसे समर्थन देंगे, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।
संक्षेप में, शशि थरूर का बयान नए संसद भवन के प्रति एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह दर्शाता है कि बदलाव के बावजूद, कुछ लोग पुरानी परंपराओं और स्थानों के प्रति अपनी भावनाएँ बनाए रखते हैं। इस प्रकार के विचारों से राजनीतिक संवाद में नई दिशा मिल सकती है।
