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शशि थरूर ने नए संसद भवन को 'बेजान' बताया

शशि थरूर ने नए संसद भवन की आलोचना की है। उन्होंने इसे 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' कहा। थरूर ने पुरानी इमारत की अपनापन की सराहना की।

21 अगस्त 202621 अगस्त 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में नए संसद भवन की आलोचना की है। उन्होंने इसे 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' करार दिया और कहा कि इसमें कोई अपनापन नहीं है। यह बयान थरूर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया।

थरूर ने नए संसद भवन के डिजाइन और उसके वातावरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुरानी इमारत में एक विशेष प्रकार का अपनापन था, जो नए भवन में नहीं है। उनका मानना है कि नए भवन की संरचना और आंतरिक सजावट में वह गर्मजोशी और आत्मीयता का अभाव है।

भारत में संसद भवन का निर्माण एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। पुराना संसद भवन 1927 में स्थापित हुआ था और यह भारतीय लोकतंत्र का प्रतीक रहा है। नए भवन का उद्घाटन हाल ही में किया गया था और इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।

थरूर के इस बयान पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। थरूर की टिप्पणियों ने संसद भवन के निर्माण और उसके महत्व पर नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता को उजागर किया है।

नए संसद भवन के बारे में थरूर की टिप्पणियों का आम लोगों पर प्रभाव पड़ा है। कई लोग उनकी बातों से सहमत हैं और पुरानी इमारत की यादों को ताजा कर रहे हैं। इस प्रकार की आलोचना से यह स्पष्ट होता है कि लोगों में नए भवन के प्रति मिश्रित भावनाएँ हैं।

इस बीच, संसद भवन के उद्घाटन के बाद कई अन्य राजनीतिक घटनाएँ भी हुई हैं। विभिन्न दलों के नेताओं ने नए भवन में अपने विचार व्यक्त किए हैं। कुछ नेताओं ने इसे आधुनिकता का प्रतीक बताया है, जबकि अन्य ने थरूर की तरह आलोचना की है।

आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या अन्य नेता भी थरूर की तरह नए संसद भवन की आलोचना करेंगे? या फिर इस पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आएँगी, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।

कुल मिलाकर, थरूर की टिप्पणियाँ नए संसद भवन के प्रति एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देती हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में भवनों का महत्व केवल उनकी भौतिक संरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं।

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