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जरांगे ने फडणवीस सरकार को दी भूख हड़ताल की चेतावनी

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जरांगे अनशन पर हैं। उन्होंने फडणवीस सरकार को 29 अगस्त तक का समय दिया है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

24 अगस्त 202624 अगस्त 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क16 बार पढ़ा गया
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मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे अनशन पर अड़े हुए हैं। उन्होंने फडणवीस सरकार को एक डेडलाइन दी है, जिसमें कहा गया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 29 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू करेंगे। यह आंदोलन महाराष्ट्र में चल रहा है और इसका मुख्य केंद्र मुंबई है।

जरांगे ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों में कुंभी प्रमाणपत्र की मांग भी शामिल है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा की है कि वे जल्द से जल्द इस मुद्दे पर कार्रवाई करें। उनका अनशन पिछले कुछ दिनों से जारी है और इसमें कई समर्थक भी शामिल हैं। यह आंदोलन राज्य में मराठा समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।

मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र में लंबे समय से चल रहा है। इस समुदाय ने शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग की है। पिछले कुछ वर्षों में इस मुद्दे पर कई आंदोलन हुए हैं, जिनमें कई बार हिंसा भी भड़की है। यह आंदोलन अब एक बार फिर से तेज हो गया है।

फडणवीस सरकार ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, सरकार के सूत्रों का कहना है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही कोई समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। जरांगे के अनशन को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

इस आंदोलन का प्रभाव स्थानीय लोगों पर पड़ रहा है। कई लोग जरांगे के समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं, जबकि कुछ लोग इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं। यदि भूख हड़ताल शुरू होती है, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। स्थानीय प्रशासन भी इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयारियों में जुटा हुआ है।

इस बीच, कुछ अन्य संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है। वे भी मराठा समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। यह समर्थन आंदोलन को और भी मजबूती प्रदान कर सकता है।

आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जरांगे की मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है। यदि सरकार समय पर कोई समाधान नहीं निकालती है, तो भूख हड़ताल शुरू होने की संभावना है। इससे स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

इस आंदोलन का महत्व इस बात में है कि यह मराठा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों को उजागर कर रहा है। जरांगे का अनशन एक बार फिर से इस मुद्दे को चर्चा में लाने का काम कर रहा है। यदि सरकार इस मुद्दे का समाधान नहीं करती है, तो इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

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