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कोलकाता की दुर्गा पूजा पर वीएचपी की अपील

कोलकाता में दुर्गा पूजा को लेकर वीएचपी ने अपील की है। उन्होंने मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ न करने की मांग की है। आयोजकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

27 अगस्त 20266 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क16 बार पढ़ा गया
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कोलकाता में दुर्गा पूजा को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने अपील की है कि पूजा के दौरान मूर्तियों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। यह मामला तब सामने आया जब विभिन्न पूजा समितियों ने इस वर्ष की थीम के अनुसार मूर्तियों में बदलाव करने की योजना बनाई थी।

वीएचपी ने स्पष्ट किया है कि पूजा की परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए और मूर्तियों को उनके पारंपरिक रूप में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि थीम के नाम पर मूर्तियों में बदलाव करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। इस अपील के बाद, आयोजकों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है।

दुर्गा पूजा भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है, विशेषकर पश्चिम बंगाल में। यह त्योहार मां दुर्गा की पूजा के लिए मनाया जाता है और इसमें विभिन्न पूजा समितियां अपनी-अपनी थीम के अनुसार मूर्तियों की सजावट करती हैं। पिछले कुछ वर्षों में, इस त्योहार के दौरान कई प्रकार के प्रयोग किए गए हैं, जो अब विवाद का कारण बन रहे हैं।

वीएचपी ने अपने बयान में कहा है कि मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ से धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन होता है। उन्होंने आयोजकों से अपील की है कि वे इस विषय पर गंभीरता से विचार करें और मूर्तियों को उनके पारंपरिक स्वरूप में बनाए रखें। यह बयान पूजा आयोजकों के लिए एक चुनौती बन सकता है।

इस अपील का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ सकता है। कई भक्त और श्रद्धालु इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या इस वर्ष की पूजा उनके लिए पहले जैसी होगी या नहीं। यदि आयोजक वीएचपी की अपील को मानते हैं, तो यह पूजा के स्वरूप को प्रभावित कर सकता है।

इस मुद्दे पर आगे की चर्चाएँ जारी हैं, और आयोजक इस पर विचार कर रहे हैं कि वे वीएचपी की अपील को किस हद तक स्वीकार करेंगे। कुछ पूजा समितियों ने पहले ही कहा है कि वे अपनी थीम के अनुसार मूर्तियों में बदलाव करना चाहती हैं, जबकि अन्य ने वीएचपी के विचारों का समर्थन किया है।

आगामी दिनों में यह स्पष्ट होगा कि आयोजक किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि वे वीएचपी की अपील को मानते हैं, तो यह दुर्गा पूजा के पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने में मदद कर सकता है। लेकिन यदि वे अपने निर्णय पर अड़े रहते हैं, तो यह विवाद और बहस को जन्म दे सकता है।

इस बहस का महत्व इस बात में है कि यह धार्मिक परंपराओं और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। दुर्गा पूजा न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की चर्चाएँ यह दर्शाती हैं कि समाज में विभिन्न विचारधाराएँ और मान्यताएँ कैसे परस्पर टकरा सकती हैं।

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