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मानसून में 14 फीसदी कमी, बारिश से आफत

इस वर्ष मानसून में देशभर में 14 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में बारिश हुई, वहां बाढ़ जैसी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। जून से अगस्त तक के मौसम का यह हाल कई जगहों पर चिंताजनक है।

1 सितंबर 20261 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क8 बार पढ़ा गया
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इस वर्ष भारत में मानसून के दौरान बारिश की मात्रा में 14 फीसदी की कमी आई है। यह स्थिति जून से अगस्त के बीच देखी गई है, जब सामान्यत: अधिक बारिश होती है। कई क्षेत्रों में बारिश होने के बावजूद, वहां बाढ़ जैसी आफत देखने को मिली है।

बारिश की कमी के कारण कई राज्यों में सूखा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिन क्षेत्रों में बारिश हुई, वहां भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेषकर उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बाढ़ ने तबाही मचाई है। यह स्थिति किसानों के लिए भी चिंताजनक है, क्योंकि उनकी फसलें प्रभावित हुई हैं।

भारत में मानसून का मौसम हर वर्ष महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह कृषि के लिए आवश्यक जल प्रदान करता है। इस वर्ष की बारिश की कमी ने कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डालने की आशंका बढ़ा दी है। इससे खाद्य सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।

सरकारी अधिकारियों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि बारिश की कमी और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू किए जाएंगे। इसके साथ ही, मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की स्थिति पर नजर रखने की बात कही है।

इस वर्ष की बारिश की कमी का प्रभाव आम लोगों पर भी पड़ा है। सूखे और बाढ़ के कारण कई लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। इसके अलावा, पानी की कमी के कारण पीने के पानी की समस्या भी उत्पन्न हो गई है।

इस बीच, कुछ राज्यों में राहत कार्य शुरू हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया जा रहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि बाढ़ से प्रभावित लोगों को चिकित्सा सहायता मिल सके।

आगामी दिनों में मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है। यदि बारिश होती है, तो इससे स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष की बारिश की कमी के कारण दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं।

इस वर्ष मानसून की स्थिति ने कृषि और जनजीवन पर गंभीर प्रभाव डाला है। बारिश की कमी और बाढ़ की समस्याएं दोनों ही चिंता का विषय हैं। यह स्थिति देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ सकता है।

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