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जादवपुर विश्वविद्यालय में दीवारों पर नारे लिखने पर वीसी की सख्ती

जादवपुर विश्वविद्यालय के वीसी ने छात्रों को दीवारों पर नारे लिखने से रोका है। उन्होंने छात्रों से सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखने की अपील की है। यह कदम विश्वविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

2 सितंबर 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल ही में दीवारों पर नारे लिखने को लेकर विश्वविद्यालय के उपकुलपति ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने छात्रों से कहा है कि वे अपनी बात सोशल मीडिया पर रखें, न कि दीवारों पर। यह निर्देश विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से दिया गया है।

उपकुलपति ने छात्रों को समझाया कि दीवारों पर नारे लिखना न केवल विश्वविद्यालय की छवि को प्रभावित करता है, बल्कि यह शैक्षणिक माहौल को भी बिगाड़ सकता है। उन्होंने छात्रों से अपेक्षा की है कि वे अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए वैकल्पिक और अधिक उचित माध्यमों का उपयोग करें। इस प्रकार के कदमों से विश्वविद्यालय के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में मदद मिलेगी।

जादवपुर विश्वविद्यालय एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है, जो अपने विचारों की स्वतंत्रता और छात्र सक्रियता के लिए जाना जाता है। हालांकि, हाल के समय में दीवारों पर नारे लिखने की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे प्रशासन चिंतित है। इस संदर्भ में, उपकुलपति का यह कदम विश्वविद्यालय में अनुशासन और व्यवस्था को पुनर्स्थापित करने के लिए आवश्यक समझा जा रहा है।

उपकुलपति ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन उनके निर्देशों को छात्रों के बीच गंभीरता से लिया जा रहा है। छात्रों ने इस पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं, कुछ ने इसे सकारात्मक कदम माना है, जबकि अन्य ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा है।

इस निर्णय का छात्रों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। कुछ छात्रों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने से उनकी आवाज़ कम प्रभावी हो जाएगी। वहीं, अन्य छात्रों का कहना है कि यह कदम विश्वविद्यालय में अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि वे छात्रों के विचारों को सुनने के लिए अन्य मंचों का आयोजन कर सकते हैं। इससे छात्रों को अपनी बात रखने का एक सुरक्षित और उचित माध्यम मिलेगा। यह कदम छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास है।

आगे, विश्वविद्यालय प्रशासन इस दिशा में और कदम उठाने की योजना बना रहा है। छात्रों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए अन्य विकल्पों की पेशकश की जा सकती है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या इस निर्णय से विश्वविद्यालय में वास्तविक बदलाव आएगा।

कुल मिलाकर, जादवपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति का यह कदम दीवारों पर नारे लिखने की प्रथा को समाप्त करने के लिए उठाया गया है। यह विश्वविद्यालय के अनुशासन और शैक्षणिक माहौल को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। छात्रों के लिए यह एक नई चुनौती हो सकती है, लेकिन यह संवाद और विचारों के आदान-प्रदान के लिए नए रास्ते खोलने का भी अवसर है।

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