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मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण किया है। जलस्तर खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंच गया। इससे रामघाट क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है।

2 सितंबर 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क0 बार पढ़ा गया
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मध्य प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी ने एक बार फिर विकराल रूप दिखाया है। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब साढ़े चार मीटर ऊपर पहुंच गया। इस स्थिति ने रामघाट क्षेत्र में बाढ़ की समस्या को गंभीर बना दिया है।

नदी का बढ़ता जलस्तर कई दुकानों, मकानों, आश्रमों और होटलों को जलमग्न कर रहा है। स्थानीय निवासियों के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की है।

मंदाकिनी नदी का यह विकराल रूप कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ चुका है। लेकिन इस बार की स्थिति अधिक गंभीर है, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। नदी के किनारे बसी बस्तियों में बाढ़ का खतरा हमेशा बना रहता है।

स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए कुछ आधिकारिक बयान जारी किए हैं। उन्होंने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। प्रशासन ने राहत कार्यों की योजना बनाने की भी बात की है।

इस बाढ़ के कारण स्थानीय निवासियों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। कई लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। दुकानों और व्यवसायों को भी नुकसान हुआ है, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

इस घटना के बाद प्रशासन ने राहत कार्यों को तेज करने का निर्णय लिया है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भेजी जा रही है। स्थानीय लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं।

आगे की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ की संभावनाओं के बारे में नियमित रूप से जानकारी देने का निर्णय लिया है। मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार, बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इस घटना ने एक बार फिर बाढ़ की समस्या को उजागर किया है। मंदाकिनी नदी का विकराल रूप और उसके प्रभाव ने स्थानीय प्रशासन और लोगों के लिए एक चुनौती पेश की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयारी और जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण है।

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