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यमुना में गणपति विसर्जन पर एनजीटी की रोक

गणपति विसर्जन के लिए यमुना नदी में रोक लगा दी गई है। एनजीटी ने यह निर्णय लिया है कि विसर्जन अब अन्य स्थानों पर होगा। कुंडों का निर्माण कैलाश, बल्केश्वर, दशहरा और हाथी घाट पर किया गया है।

19 सितंबर 2026 • 19 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क22 बार पढ़ा गया
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गणपति विसर्जन के दौरान यमुना नदी में बप्पा की विदाई पर रोक लगा दी गई है। यह निर्णय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा लिया गया है। यह आदेश हाल ही में जारी किया गया है और इसके तहत विसर्जन के लिए अन्य स्थानों का प्रावधान किया गया है।

एनजीटी ने इस रोक के साथ ही विसर्जन के लिए नए कुंडों का निर्माण करने का निर्देश दिया है। ये कुंड कैलाश, बल्केश्वर, दशहरा और हाथी घाट पर बनाए गए हैं। इस व्यवस्था के तहत भक्त अब इन कुंडों में गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकेंगे।

इस निर्णय का背景 यमुना नदी की प्रदूषण की स्थिति से जुड़ा हुआ है। एनजीटी ने पहले भी नदी के प्रदूषण को लेकर कई बार चेतावनी दी थी। इस बार के आदेश का उद्देश्य नदी के जल को स्वच्छ रखना और पर्यावरण की सुरक्षा करना है।

एनजीटी ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि विसर्जन के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थानों का चयन किया गया है। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है और इसका पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

इस रोक का प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा, विशेषकर उन भक्तों पर जो हर साल यमुना में गणपति विसर्जन करते थे। अब उन्हें नए कुंडों में जाकर विसर्जन करना होगा, जो कुछ लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है। हालांकि, यह कदम पर्यावरण की दृष्टि से आवश्यक माना जा रहा है।

इस निर्णय के बाद, प्रशासन ने कुंडों के निर्माण और उनकी देखरेख के लिए आवश्यक उपाय किए हैं। भक्तों को इन कुंडों के स्थान और उपयोग के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही, सुरक्षा और स्वच्छता के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

आगे की कार्रवाई में, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भक्तों को विसर्जन के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा, एनजीटी के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी भी की जाएगी।

इस निर्णय का महत्व इस बात में है कि यह यमुना नदी के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा करेगा, बल्कि भविष्य में नदी के जल की गुणवत्ता को भी बनाए रखेगा। गणपति विसर्जन के लिए नए स्थानों का चयन भक्तों के लिए एक नई व्यवस्था का संकेत है।

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