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नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने यूपीआई शुल्क पर विचार साझा किया

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने यूपीआई लेनदेन पर जीरो फीस की आवश्यकता बताई। उनका मानना है कि यह व्यवस्था कुछ सालों तक बनी रहनी चाहिए। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।

21 सितंबर 2026 • 21 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क20 बार पढ़ा गया
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हाल ही में नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने यूपीआई लेनदेन पर जीरो फीस बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कुछ सालों तक जारी रहनी चाहिए। उनका यह बयान डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के संदर्भ में आया है।

उन्होंने बताया कि जीरो फीस की व्यवस्था से उपभोक्ताओं को डिजिटल लेनदेन करने में आसानी होती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को लाभ होता है, बल्कि व्यापारियों को भी अपने व्यवसाय को बढ़ाने का अवसर मिलता है। यह कदम भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली, विशेषकर यूपीआई, ने पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति की है। यूपीआई की शुरुआत के बाद से, यह प्रणाली तेजी से लोकप्रिय हुई है और लाखों लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। इस संदर्भ में जीरो फीस की व्यवस्था ने इस प्रणाली को और अधिक आकर्षक बनाया है।

नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि शुल्क लगाया जाता है, तो यह उपभोक्ताओं के लिए एक बाधा बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस पर विचार करना चाहिए ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा सके।

इस निर्णय का आम लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जीरो फीस की व्यवस्था से अधिक लोग डिजिटल लेनदेन अपनाएंगे, जिससे वित्तीय समावेशन में वृद्धि होगी। इसके अलावा, यह छोटे व्यापारियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अन्य विकास भी हो रहे हैं। सरकार और वित्तीय संस्थान इस दिशा में कई योजनाएं बना रहे हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को और अधिक सुगम बनाना है।

आगे की योजना में, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि जीरो फीस की व्यवस्था को जारी रखा जाता है, तो यह डिजिटल अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा।

इस प्रकार, यूपीआई लेनदेन पर जीरो फीस की आवश्यकता को लेकर उठाए गए सवाल महत्वपूर्ण हैं। यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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