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एपल मैनेजर हत्याकांड में दोषी सिपाही को दस साल की सजा

लखनऊ में एपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को दस साल की सजा सुनाई गई। दूसरे आरोपी संदीप कुमार को बरी कर दिया गया। पत्नी कल्पना इस फैसले से संतुष्ट नहीं थीं।

21 सितंबर 2026 • 21 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क12 बार पढ़ा गया
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लखनऊ में वर्ष 2018 में हुए एपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत ने पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दस साल की सजा सुनाई। यह फैसला हाल ही में सुनाया गया है और इस मामले ने समाज में काफी चर्चा उत्पन्न की है। दूसरे आरोपी संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

इस मामले में विवेक तिवारी की हत्या की घटना उस समय हुई थी जब वह अपनी कार में यात्रा कर रहे थे। आरोप है कि प्रशांत चौधरी ने विवेक पर गोली चलाई थी, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे समाज को प्रभावित किया था।

विवेक तिवारी की हत्या ने पुलिस और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। यह घटना उस समय की है जब देश में पुलिस की भूमिका और उनके कार्यों पर चर्चा चल रही थी। इस मामले ने लोगों के बीच सुरक्षा और न्याय की भावना को प्रभावित किया।

अदालत के इस फैसले पर विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना ने अपनी असंतोष व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय की पूरी उम्मीद थी, लेकिन सजा की अवधि उन्हें संतोषजनक नहीं लगी। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर कई सामाजिक संगठनों ने भी आवाज उठाई है।

इस हत्याकांड का प्रभाव विवेक तिवारी के परिवार पर गहरा पड़ा है। उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों ने इस घटना के बाद से मानसिक और भावनात्मक तनाव का सामना किया है। समाज में भी इस घटना के कारण सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ी है।

इस मामले में आगे की प्रक्रिया में अपील की संभावना बनी हुई है। यदि पत्नी कल्पना या अन्य परिवार के सदस्य इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करते हैं, तो मामला फिर से सुर्खियों में आ सकता है। ऐसे में न्यायालय की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

इस मामले में अदालत का फैसला एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह समाज में सुरक्षा और न्याय के मुद्दों को उजागर करता है। विवेक तिवारी की हत्या ने न केवल उनके परिवार को प्रभावित किया, बल्कि समाज में कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

अंततः, इस मामले का फैसला न्याय की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह दर्शाता है कि कानून के सामने सभी को समान रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस घटना की गूंज समाज में लंबे समय तक बनी रहेगी।

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