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आईएसएफ ने चुनाव आयोग के फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी

आईएसएफ ने चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। यह सुनवाई आज होगी, जिसमें विधायक नौशाद सिद्दीकी की याचिका पर विचार किया जाएगा। चुनाव आयोग ने आईएसएफ का प्रतीक 'लिफाफा' बदलने का निर्णय लिया था।

22 सितंबर 2026 • 22 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क10 बार पढ़ा गया
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इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने चुनाव आयोग के एक निर्णय को चुनौती देने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। यह सुनवाई आज होने वाली है। याचिका में विधायक नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के द्वारा आईएसएफ का प्रतीक 'लिफाफा' बदलने के निर्णय को चुनौती दी है।

इस मामले में अधिक जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने आईएसएफ के प्रतीक को बदलने का निर्णय हाल ही में लिया था। इस निर्णय के बाद आईएसएफ ने इसे अनुचित और असंगत बताते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। विधायक नौशाद सिद्दीकी का कहना है कि इस निर्णय से पार्टी की पहचान को नुकसान पहुंचा है।

आईएसएफ का गठन 2020 में हुआ था और यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में भी भाग लिया था और अपने प्रतीक के माध्यम से पहचान बनाई थी। चुनाव आयोग का यह निर्णय पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

इस मामले में अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। हालांकि, आईएसएफ ने अपने पक्ष को न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है। यह सुनवाई आज होने वाली है, जिसमें न्यायालय इस मामले पर विचार करेगा।

इस निर्णय का आम लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। आईएसएफ के समर्थक इस निर्णय को लेकर चिंतित हैं और पार्टी की पहचान को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि न्यायालय ने आईएसएफ के पक्ष में निर्णय दिया, तो यह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण जीत होगी।

इस बीच, चुनाव आयोग के अन्य निर्णयों और प्रक्रियाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। राजनीतिक दलों के प्रतीकों और नामों के संबंध में आयोग के निर्णयों को लेकर विवाद अक्सर उठते रहते हैं। ऐसे में इस मामले का परिणाम अन्य राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

आगे की प्रक्रिया में, कलकत्ता हाईकोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा और इसके बाद निर्णय सुनाएगा। यदि न्यायालय ने आईएसएफ के पक्ष में निर्णय दिया, तो चुनाव आयोग को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

इस मामले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह राजनीतिक दलों के प्रतीकों और पहचान के अधिकारों से संबंधित है। आईएसएफ का यह संघर्ष न केवल पार्टी के लिए, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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