शनिवार, 10 अक्टूबर 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
raajneeti

यूएन में नेतन्याहू के भाषण पर 75 देशों का वॉकआउट

75 देशों ने नेतन्याहू के भाषण के दौरान वॉकआउट किया। यह घटना गाजा में नरसंहार के आरोपों के संदर्भ में हुई। ममदानी को भी इस भाषण पर आलोचना का सामना करना पड़ा।

25 सितंबर 2026 • 25 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क28 बार पढ़ा गया
WXfT

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान 75 देशों ने वॉकआउट किया। यह घटना तब हुई जब नेतन्याहू ने गाजा में नरसंहार के आरोपों का जवाब दिया। उनके भाषण ने कई देशों के प्रतिनिधियों को असंतोष में छोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप यह सामूहिक वॉकआउट हुआ।

वॉकआउट का मुख्य कारण नेतन्याहू का गाजा में इजरायल की कार्रवाई को लेकर दिया गया बयान था। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में होने वाली हिंसा के लिए अन्य देशों को जिम्मेदार ठहराया गया। इस भाषण के दौरान, उन्होंने ममदानी को भी लताड़ा, जो कि गाजा में इजरायल की नीतियों की आलोचना कर रहे थे।

इस घटना का एक महत्वपूर्ण संदर्भ यह है कि इजरायल और गाजा के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ समय से, गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और उसके परिणामस्वरूप होने वाली मानव हानि ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। इस प्रकार की घटनाएं वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे को भी उजागर करती हैं।

इस वॉकआउट पर विभिन्न देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। हालांकि, विशेष रूप से किसी एक देश ने इस घटना पर विस्तृत बयान नहीं दिया है। लेकिन, यह स्पष्ट है कि कई देशों ने इजरायल की नीतियों के प्रति अपनी असहमति व्यक्त की है।

इस घटना का आम लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। गाजा में रहने वाले नागरिकों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ हिस्से इजरायल की कार्रवाई की निंदा कर रहे हैं। इस वॉकआउट ने विश्व स्तर पर मानवाधिकारों के मुद्दे को फिर से जीवित किया है।

इस बीच, कुछ देशों ने इस घटना के बाद इजरायल के खिलाफ और अधिक सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है। यह देखा जाना बाकी है कि क्या यह वॉकआउट किसी प्रकार की राजनीतिक कार्रवाई का कारण बनेगा।

आगे की स्थिति में, यह महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर एकजुट हो और गाजा में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए। नेतन्याहू के भाषण और उसके परिणामस्वरूप हुए वॉकआउट ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे पर गहरी चिंता है।

संक्षेप में, यह घटना न केवल इजरायल-गाजा संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मानवाधिकारों के मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित करती है। 75 देशों का वॉकआउट एक स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक समुदाय इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

टैग:
इजरायलगाजासंयुक्त राष्ट्रमानवाधिकार
WXfT

raajneeti की और ख़बरें

और पढ़ें →