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जयशंकर का बयान: ब्रिक्स और यूएन में टकराव नहीं

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र के बीच चयन करना गलत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों का साथ-साथ होना संभव है।

26 सितंबर 2026 • 26 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क26 बार पढ़ा गया
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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में एक बयान में कहा कि ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र के बीच चयन करना एक गलत धारणा है। उन्होंने यह टिप्पणी एक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उन्होंने दोनों संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंचों पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि ब्रिक्स और यूएन के बीच कोई टकराव नहीं है, बल्कि दोनों को सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि दोनों संस्थाएं एक-दूसरे के पूरक हैं और एक साथ काम कर सकती हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) और संयुक्त राष्ट्र दोनों ही वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कई बार इन दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न होती है। जयशंकर ने इस धारणा को खारिज करते हुए कहा कि यह एक गलतफहमी है।

इस बयान के बाद, विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत दोनों संस्थाओं में सुधार के लिए काम करेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य वैश्विक स्तर पर एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है। इस प्रकार, भारत की नीति दोनों संगठनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की है।

जयशंकर के इस बयान का प्रभाव लोगों पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि भारत वैश्विक मंचों पर सक्रिय रूप से भाग लेगा और सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। यह दृष्टिकोण भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत कर सकता है।

इस बीच, भारत ने ब्रिक्स और यूएन दोनों में अपनी भूमिका को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया और यूएन में भी सक्रियता दिखाई है। यह दोनों मंचों पर भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

आगे बढ़ते हुए, यह देखना होगा कि भारत इन दोनों संस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाता है। जयशंकर के बयान के बाद, उम्मीद की जा रही है कि भारत अपने वैश्विक सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय नीति में एक नई दिशा मिल सकती है।

इस प्रकार, जयशंकर का यह बयान ब्रिक्स और यूएन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत की वैश्विक रणनीति को स्पष्ट करता है और सुधार की आवश्यकता पर जोर देता है। दोनों संस्थाओं के बीच सहयोग से वैश्विक मुद्दों का समाधान संभव हो सकता है।

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