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नितिन नवीन ने बंगाल में 56 सेकंड में बनाई 'झालमुरी'

नितिन नवीन ने बंगाल में 'झालमुरी' बनाने का प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे केवल 56 सेकंड में तैयार किया। इसके बाद उन्होंने इसका स्वाद लिया।

28 सितंबर 2026 • 28 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क32 बार पढ़ा गया
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हाल ही में नितिन नवीन बंगाल पहुंचे, जहाँ उन्होंने एक विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 56 सेकंड में खुद से 'झालमुरी' बनाई। यह घटना बंगाल के एक प्रमुख स्थान पर हुई, जहाँ स्थानीय लोगों ने इस प्रदर्शन को देखा।

नितिन नवीन ने 'झालमुरी' बनाने की प्रक्रिया को दर्शकों के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने चटपटी सामग्री और ताजगी के साथ इसे तैयार किया, जिससे सभी दर्शक प्रभावित हुए। इस दौरान उन्होंने स्थानीय संस्कृति और खाद्य परंपरा की भी सराहना की।

'झालमुरी' बंगाल की एक प्रसिद्ध स्नैक है, जो चिउड़े, सब्जियाँ और मसालों के मिश्रण से बनाई जाती है। यह विशेष रूप से गर्मियों में लोकप्रिय है और इसे हल्का और कुरकुरा स्नैक माना जाता है। नितिन नवीन का यह प्रयास स्थानीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने का एक हिस्सा है।

इस कार्यक्रम में नितिन नवीन ने कहा कि वे भारतीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों को एकजुट करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

स्थानीय लोगों ने नितिन नवीन के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि स्थानीय खाद्य परंपराओं को भी जीवित रखते हैं। 'झालमुरी' का स्वाद लेकर लोगों ने इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की इच्छा व्यक्त की।

इस घटना के बाद, बंगाल में अन्य खाद्य कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है। नितिन नवीन के इस प्रदर्शन ने स्थानीय बाजारों में खाद्य उत्पादों की बिक्री को भी प्रभावित किया है। लोग अब 'झालमुरी' बनाने की विधि सीखने में रुचि दिखा रहे हैं।

आगे की योजना में, नितिन नवीन अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य भारतीय खाद्य संस्कृति को और अधिक व्यापक रूप से फैलाना है। इस तरह के कार्यक्रमों से स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस घटना ने न केवल नितिन नवीन की लोकप्रियता को बढ़ाया है, बल्कि बंगाल की खाद्य संस्कृति को भी एक नई पहचान दी है। 'झालमुरी' जैसे पारंपरिक व्यंजन को फिर से जीवित करने का यह प्रयास महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय खाद्य परंपराएँ आधुनिक समय में भी प्रासंगिक बनी हुई हैं।

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