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हिमाचल में बर्फबारी से तापमान में गिरावट

हिमाचल प्रदेश में लगातार तीसरे दिन बर्फबारी हुई। तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। कल्पा में ठंड ने 18 साल का रिकॉर्ड तोड़ा।

28 सितंबर 2026 • 28 सितंबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क40 बार पढ़ा गया
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हिमाचल प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन बर्फबारी हुई। यह घटना किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई, जबकि कांगड़ा के धौलाधार में भी बर्फबारी देखी गई। राजधानी शिमला और धर्मशाला समेत अन्य जिलों में भी बारिश हुई।

मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार, इस बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट आई है। तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। विशेष रूप से कल्पा में ठंड ने पिछले 18 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ा है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

इस बर्फबारी का एक महत्वपूर्ण संदर्भ यह है कि हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के मौसम में बर्फबारी आम है, लेकिन इस बार की बर्फबारी ने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इससे पहले के वर्षों में भी बर्फबारी हुई थी, लेकिन इस बार की तीव्रता ने सभी को चौंका दिया है। मौसम के इस बदलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन का भी असर हो सकता है।

हालांकि, मौसम विभाग ने इस बर्फबारी के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन स्थानीय प्रशासन ने बर्फबारी के कारण संभावित समस्याओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। इससे लोगों को सुरक्षित रहने और यात्रा करने में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

बर्फबारी का प्रभाव स्थानीय लोगों पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में सड़कें बाधित हो गई हैं, जिससे लोगों को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, तापमान में गिरावट के कारण ठंड से प्रभावित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

इस घटना के साथ ही मौसम में और भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में और बर्फबारी या बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने आवश्यक तैयारियों के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

आगे की स्थिति को देखते हुए, स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की निगरानी जारी रहेगी। यदि बर्फबारी की तीव्रता बढ़ती है, तो इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू किया जा सकता है। लोगों को मौसम के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई है।

इस बर्फबारी की घटना ने हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के मौसम की गंभीरता को उजागर किया है। यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस प्रकार की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी दर्शाती हैं।

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