गांधी-शास्त्री जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई अन्य नेताओं ने महात्मा गांधी को नमन किया। यह आयोजन हर साल देशभर में मनाया जाता है।
इस अवसर पर नेताओं ने बापू की प्रतिमा पर फूल चढ़ाए और मौन धारण किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे। यह दिन महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था, जबकि लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ। गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा के सिद्धांत को अपनाया, जबकि शास्त्री जी ने भारत-पाक युद्ध के दौरान "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया। इन दोनों नेताओं का योगदान भारतीय इतिहास में अमिट है।
इस आयोजन पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी गांधी जी के सिद्धांतों को याद करते हुए उनके योगदान को सराहा। इस प्रकार के आयोजन समाज में एकता और शांति का संदेश फैलाते हैं।
गांधी और शास्त्री की जयंती पर श्रद्धांजलि देने का यह आयोजन लोगों में एकजुटता और प्रेरणा का संचार करता है। यह दिन न केवल नेताओं के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। लोग इस दिन को याद करते हैं और बापू के विचारों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
इस साल के आयोजन के साथ ही, कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं, जो गांधी जी के विचारों को फैलाने के लिए समर्पित हैं। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जहां छात्रों को गांधी जी के जीवन और उनके सिद्धांतों के बारे में बताया गया।
आगे की योजना में, सरकार गांधी जी के विचारों को और अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए विभिन्न अभियान चलाने की योजना बना रही है। इसके अलावा, शास्त्री जी के योगदान को भी याद किया जाएगा। यह आयोजन आने वाले समय में भी जारी रहेगा।
गांधी-शास्त्री जयंती का यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि यह समाज में अहिंसा और एकता का संदेश भी फैलाता है। इस दिन को मनाने से हम अपने नेताओं के विचारों को याद करते हैं और उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करते हैं।




