ग्वालियर जूलॉजिकल पार्क से सफेद बाघ ‘तेजस’ को बाघ विनिमय कार्यक्रम के तहत देहरादून चिड़ियाघर लाया गया है। यह बाघ 556 किमी की दूरी तय करके देहरादून पहुंचा है। तेजस की यह यात्रा बाघों के संरक्षण और प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तेजस को देहरादून चिड़ियाघर में लाने के बाद उसे 20 दिन का एकांतवास दिया जाएगा। इस दौरान बाघ को नए वातावरण में समायोजित होने का समय मिलेगा। एकांतवास के बाद, इसे एक महीने बाद दर्शकों के लिए खोला जाएगा।
सफेद बाघों का संरक्षण भारत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सफेद बाघों की संख्या में कमी आई है, और ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। तेजस का देहरादून चिड़ियाघर में आना इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
देहरादून चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि तेजस के आने से चिड़ियाघर में बाघों की विविधता बढ़ेगी। यह बाघ अन्य बाघों के साथ रहने और प्रजनन करने में मदद करेगा। अधिकारियों ने तेजस के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।
इस बाघ के आगमन से स्थानीय लोगों में उत्साह है। लोग तेजस को देखने के लिए चिड़ियाघर आने की योजना बना रहे हैं। यह बाघ चिड़ियाघर के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
इस बीच, चिड़ियाघर में अन्य जानवरों की देखभाल और प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि तेजस के लिए विशेष देखभाल की जाएगी। इसके अलावा, चिड़ियाघर में अन्य जानवरों के लिए भी बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
आगे की प्रक्रिया में, तेजस के एकांतवास के बाद उसके स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी। एक महीने बाद, इसे दर्शकों के लिए खोला जाएगा। इस दौरान, चिड़ियाघर प्रबंधन तेजस के व्यवहार और स्वास्थ्य पर ध्यान देगा।
सफेद बाघ तेजस का देहरादून चिड़ियाघर में आना संरक्षण के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बाघ न केवल चिड़ियाघर के लिए बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए भी एक नया आकर्षण होगा। इसके माध्यम से बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा।


