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शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, विशेष संयोग बना

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू हो रहा है। यह 10 दिनों तक चलेगा और इस बार अष्टमी की तिथि दो दिन रहेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से यह एक दुर्लभ संयोग है।

2 अक्टूबर 2026 • 2 अक्टूबर 2026स्रोत: शुक्रवार डेस्क14 बार पढ़ा गया
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इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है, जो पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक मनाया जाएगा। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का विशेष अवसर है, जिसमें भक्तजन विभिन्न अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। नवरात्र का यह पर्व हर साल बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।

इस नवरात्र में अष्टमी की तिथि दो दिन रहेगी, जो कि 17 और 18 अक्टूबर को आएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह केवल छठवीं बार है जब पिछले 50 वर्षों में ऐसा दुर्लभ संयोग बना है। इस दौरान भक्तजन विशेष रूप से मां दुर्गा की आराधना में लीन रहेंगे।

नवरात्र का पर्व भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। इस दौरान लोग अपने घरों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करते हैं और 9 दिनों तक उनकी पूजा करते हैं।

इस पर्व के दौरान धार्मिक संस्थाओं और मंदिरों द्वारा विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। भक्तजन इस अवसर पर विशेष अनुष्ठान और भजन-कीर्तन में भाग लेंगे। यह समय श्रद्धा और भक्ति का होता है, जिसमें लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर मां की आराधना करते हैं।

नवरात्र के दौरान लोग अपने-अपने तरीके से इस पर्व को मनाते हैं। कुछ लोग उपवास रखते हैं, जबकि अन्य विशेष पकवान बनाकर मां को भोग अर्पित करते हैं। इस पर्व का लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे वे मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त होते हैं।

इस वर्ष नवरात्र के दौरान कई धार्मिक कार्यक्रम और मेले भी आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। भक्तजन इन आयोजनों में भाग लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।

नवरात्र का पर्व समाप्त होने के बाद दशहरा का पर्व मनाया जाएगा, जो विजय का प्रतीक है। इस दौरान लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं। नवरात्र और दशहरा का यह क्रम भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है।

इस प्रकार, शारदीय नवरात्र का पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। इस पर्व के दौरान भक्तजन मां दुर्गा की आराधना में लीन रहेंगे और अपने जीवन में सकारात्मकता का संचार करेंगे।

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