इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्तूबर से आरंभ हो रहा है, जो पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक मनाया जाएगा। यह पर्व मां दुर्गा की आराधना का समय है, जिसमें भक्तजन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को होगा, जिसमें दशहरा का पर्व भी शामिल है।
इस नवरात्र में अष्टमी की तिथि दो दिन रहेगी, जो 18 और 19 अक्टूबर को आएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग भी बन रहा है। यह संयोग भक्तों के लिए विशेष लाभकारी माना जा रहा है। इस प्रकार का संयोग पिछले 50 वर्षों में केवल छठी बार देखने को मिल रहा है।
शारदीय नवरात्र का पर्व भारत में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति का भी अभिन्न हिस्सा है। नवरात्र के दौरान भक्तजन उपवास रखते हैं और मां दुर्गा की आराधना में लीन रहते हैं। यह पर्व शक्ति, समर्पण और भक्ति का संदेश देता है।
इस अवसर पर कई धार्मिक संस्थाएं और मंदिर विशेष कार्यक्रम आयोजित करते हैं। भक्तजन मां दुर्गा की आराधना के लिए मंदिरों में भीड़ लगाते हैं। इस वर्ष भी विभिन्न स्थानों पर भव्य पंडाल सजाए जाएंगे, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
नवरात्र के दौरान, लोग अपने घरों में भी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह समय परिवार के साथ मिलकर मां दुर्गा की आराधना करने का होता है। भक्तजन इस दौरान विशेष पकवान बनाते हैं और एक-दूसरे को नवरात्र की शुभकामनाएं देते हैं।
इस पर्व के साथ ही विभिन्न स्थानों पर मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ये कार्यक्रम न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक होते हैं। इस दौरान लोग एकत्रित होकर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।
आगे, भक्तजन इस पर्व के दौरान मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष उपाय और अनुष्ठान करेंगे। नवरात्र के अंतिम दिन, विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन रावण दहन की परंपरा भी निभाई जाती है।
इस प्रकार, शारदीय नवरात्र का पर्व न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ करता है, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। इस वर्ष का विशेष संयोग भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

