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जयशंकर का यूरोप में रूस के समर्थन पर बयान

जयशंकर ने यूरोप में कहा कि रूस ने भारत का समर्थन किया। उन्होंने यह भी बताया कि कई देश पाकिस्तान के साथ थे। यह बयान भारत-रूस संबंधों की मजबूती को दर्शाता है।

4 अक्टूबर 2026 • 5 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क12 बार पढ़ा गया
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भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में यूरोप में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि रूस तब भी भारत के साथ खड़ा था, जब कई देश पाकिस्तान के समर्थन में थे। यह बयान उस समय आया जब भारत और रूस के बीच संबंधों को लेकर चर्चा चल रही थी।

जयशंकर ने यह बात यूरोप में एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर जोर दिया और कहा कि यह संबंध किसी भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति में मजबूत रहे हैं। उनका यह बयान भारत की विदेश नीति को स्पष्ट करता है, जिसमें रूस के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी गई है।

भारत और रूस के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। दोनों देशों ने कई दशकों से एक-दूसरे का समर्थन किया है, खासकर जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके हितों का टकराव हुआ है। जयशंकर का यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक राजनीति में बदलाव आ रहा है और कई देश अपनी रणनीतियों को पुनर्व्यवस्थित कर रहे हैं।

हालांकि, इस बयान पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ संबंधों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के लिए रूस का सहयोग महत्वपूर्ण है।

इस बयान का प्रभाव भारतीय जनता पर भी पड़ सकता है। लोग यह देख रहे हैं कि कैसे भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रबंधित करता है, विशेषकर जब पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है। जयशंकर के बयान ने यह स्पष्ट किया है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए दृढ़ है।

इस बीच, भारत और रूस के बीच कुछ नई विकास योजनाएँ भी चल रही हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर चर्चा की जा रही है। यह सहयोग भारत की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। भारत अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रयास करेगा, खासकर रूस के साथ। जयशंकर के बयान ने यह संकेत दिया है कि भारत अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।

कुल मिलाकर, जयशंकर का यह बयान भारत-रूस संबंधों की मजबूती को दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलाव आ रहे हों। इस प्रकार, यह बयान भारत की विदेश नीति की दिशा को स्पष्ट करता है।

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