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असम में बाढ़ राहत पर सियासत तेज, सीएम सरमा की टिप्पणी

असम में बाढ़ राहत को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अखिल गोगोई पर आरोप लगाया है। उन्होंने राहत कार्य में देरी का भी सवाल उठाया।

5 अक्टूबर 2026 • 5 दिन पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क24 बार पढ़ा गया
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असम में बाढ़ राहत को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि वह अखिल गोगोई को राहत कार्य का श्रेय नहीं लेने देंगे। यह बयान हाल ही में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की स्थिति को लेकर आया है। बाढ़ ने असम के कई जिलों को प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री सरमा ने बाढ़ राहत कार्यों में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार राहत कार्यों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि राहत कार्यों में पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

असम में बाढ़ की समस्या कोई नई नहीं है, यह हर साल मानसून के दौरान होती है। पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ ने असम के कई क्षेत्रों में व्यापक नुकसान पहुँचाया है। बाढ़ के कारण लोगों की जिंदगी और आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जिससे राहत कार्यों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर एकजुट होकर काम करें।

बाढ़ राहत कार्यों में देरी से प्रभावित लोगों में चिंता बढ़ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है। बाढ़ के कारण कई परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है।

इस बीच, कुछ राजनीतिक दलों ने राहत कार्यों की गति पर सवाल उठाए हैं और सरकार से अधिक सक्रियता की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राहत कार्यों में राजनीतिक लाभ के लिए देरी की जा रही है। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी है।

आगे की योजना के तहत, सरकार ने बाढ़ राहत कार्यों को तेज करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे सभी आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता मिल सके। इसके अलावा, सरकार ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने का भी निर्णय लिया है।

इस घटनाक्रम का महत्व इस बात में है कि यह असम में बाढ़ राहत कार्यों की स्थिति को उजागर करता है। राजनीतिक सियासत के बीच, प्रभावित लोगों की मदद करना सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय करेगी।

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