गुरुवार, 9 जुलाई 2026भाषा: हिंदी
शुक्रवार डिजिटल
raajneeti

CJP का 20 जुलाई को संसद मार्च, सोनम वांगचुक करेंगे अगुवाई

प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ 20 जुलाई को संसद मार्च का आयोजन होगा। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में अब और उग्रता आएगी। इस मार्च का नेतृत्व सोनम वांगचुक करेंगे।

9 जुलाई 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
WXfT

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन अब और उग्र रूप लेने जा रहा है। 20 जुलाई को 'सोफे से नहीं, जंतर-मंतर आइए' के नारे के साथ एक संसद मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस मार्च का नेतृत्व प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक करेंगे।

इस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग करना और छात्रों की आवाज को उठाना है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर अनियमितताएँ हैं, जो छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। जंतर-मंतर पर यह आंदोलन पिछले कुछ समय से चल रहा है और अब इसे और अधिक संगठित किया जा रहा है।

पिछले कुछ महीनों में, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते छात्रों में गहरा असंतोष व्याप्त है। छात्रों का कहना है कि उनकी मेहनत और समय को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस संदर्भ में, विभिन्न छात्र संगठनों ने एकजुट होकर आवाज उठाने का निर्णय लिया है।

इस मार्च के आयोजन को लेकर सीजेपी (सिटिज़न फॉर जस्टिस एंड पीस) ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि यह मार्च छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। सीजेपी ने सभी छात्रों और नागरिकों से इस मार्च में भाग लेने की अपील की है।

इस आंदोलन का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ रहा है, जो अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर चिंतित हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के कारण कई छात्रों का मनोबल गिरा है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यदि उनकी आवाज को सुना नहीं गया, तो वे आगे और भी उग्र प्रदर्शन करेंगे।

इस बीच, अन्य छात्र संगठनों ने भी इस मार्च का समर्थन किया है और इसे सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया पर भी इस मार्च के लिए जागरूकता फैलाना शुरू कर दिया है। इससे पहले भी कई बार छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं।

आगामी 20 जुलाई को होने वाले इस संसद मार्च के बाद, छात्रों की मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा। यदि सरकार इस मुद्दे पर ध्यान नहीं देती है, तो छात्रों का आंदोलन और भी तेज हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।

इस मार्च का आयोजन छात्रों के अधिकारों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है कि वे अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। इस प्रकार के आंदोलनों से समाज में जागरूकता बढ़ती है और लोकतंत्र की मजबूती में योगदान मिलता है।

टैग:
CJPसंसद मार्चप्रतियोगी परीक्षाएंसोनम वांगचुक
WXfT

raajneeti की और ख़बरें

और पढ़ें →