हाल ही में जारी SDG-7 ऊर्जा प्रगति रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुनिया के 65.5 करोड़ लोग अब भी बिजली से वंचित हैं। यह रिपोर्ट विश्व बैंक द्वारा प्रस्तुत की गई है और इसमें वैश्विक ऊर्जा पहुंच की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग दो अरब लोग प्रदूषित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली की कमी और प्रदूषित ईंधन का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि से यह स्पष्ट होता है कि ऊर्जा की पहुंच में सुधार की आवश्यकता है। इस स्थिति का मुख्य कारण विकासशील देशों में ऊर्जा अवसंरचना की कमी और आर्थिक संसाधनों की कमी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता में कमी से यह समस्या और बढ़ गई है।
इस रिपोर्ट का संदर्भ लेते हुए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की पहुंच एक महत्वपूर्ण विकास लक्ष्य है। SDG-7 का उद्देश्य सभी लोगों के लिए सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। लेकिन वर्तमान स्थिति इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा बन रही है।
रिपोर्ट में विश्व बैंक के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ऊर्जा की पहुंच में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकारों को स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने और प्रदूषण को कम करने के लिए नीतियों को लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए।
इस स्थिति का प्रभाव लोगों के जीवन पर गहरा है। बिजली की कमी से न केवल दैनिक जीवन प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास भी बाधित होते हैं। प्रदूषित ईंधन के उपयोग से स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं, जो लोगों की जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे से निपटने के लिए कई देशों में नीतिगत बदलाव हो रहे हैं। कुछ देश स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं, जबकि अन्य ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए उपाय कर रहे हैं। यह प्रयास वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की पहुंच में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आगे की दिशा में, यह आवश्यक है कि देशों को मिलकर काम करना होगा ताकि SDG-7 के लक्ष्यों को हासिल किया जा सके। स्वच्छ ऊर्जा के लिए निवेश बढ़ाना और प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समर्थन की आवश्यकता होगी।
इस रिपोर्ट का महत्व इस बात में है कि यह वैश्विक ऊर्जा पहुंच की स्थिति को उजागर करती है और इसे सुधारने के लिए आवश्यक कदमों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। यदि इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए गए, तो लाखों लोग बिजली और स्वच्छ ऊर्जा से वंचित रह जाएंगे। यह न केवल विकास के लिए चुनौती है, बल्कि मानवता के लिए भी एक गंभीर समस्या है।
