उत्तर प्रदेश पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है जब उसने अवैध किडनी प्रत्यारोपण की व्यापक साजिश का मास्टरमाइंड रोहित तिवारी को गिरफ्तार किया। रोहित तिवारी ने पिछले कई वर्षों तक दिल्ली, कानपुर, लखनऊ और उत्तर भारत के अन्य प्रमुख शहरों में यह आपराधिक नेटवर्क संचालित किया था। इस गिरोह के माध्यम से सैकड़ों गरीब लोगों की किडनियां अवैध तरीके से खरीदी गईं और संपन्न रोगियों को प्रत्यारोपित की गईं।
रोहित तिवारी का यह पूरा अंतर्जाल अत्यंत सुचिंतित तरीके से संचालित होता था। वह स्वयं को "वन मैन आर्मी" के रूप में काम करता था और प्रत्येक कदम पर व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करता था। उसके पास दाता खोजने से लेकर दस्तावेज तैयार करने तक का पूरा नेटवर्क था। मेडिकल पेशेवरों, दलालों और अस्पताल के कर्मचारियों का एक पूरा गिरोह इस काले कारोबार में शामिल था। लाभ का एक बड़ा हिस्सा रोहित को जाता था, जबकि बाकी हिस्सेदारों में बंटा जाता था।
पुलिस को रोहित तिवारी का पता लगाने में कई महीनों की मेहनत लगी। विभिन्न पीड़ितों और सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने इस नेटवर्क पर नजर रखी। अंतत: एक छोटी सी गलती ही रोहित के पकड़े जाने का कारण बनी। उसकी गर्लफ्रेंड के साथ व्हाट्सएप कॉल पर की गई बातचीत में वह अनजाने में अपराध से संबंधित जानकारी साझा कर गया। पुलिस को इसी बातचीत की रिकॉर्डिंग मिली जिससे पूरा मामला उजागर हो गया।
गिरफ्तारी के बाद रोहित तिवारी ने अपने अपराधों को स्वीकार कर लिया है। उसके पास से जब्त किए गए दस्तावेजों में सैकड़ों पीड़ितों के नाम, पते और बैंक विवरण मिले हैं। यह मामला देश में अवैध अंग तस्करी की गंभीरता को दर्शाता है। पुलिस अब रोहित के आपराधिक नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।