महाकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' हिंदी साहित्य के उन महान रचनाकारों में से हैं जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज को गहरे संदेश दिए हैं। उनकी प्रसिद्ध कविता 'खिली भू पर जब से तुम नारि' नारी की महत्ता और उसके योगदान को रेखांकित करने वाली एक मौलिक रचना है। इस कविता में दिनकर ने नारी को पृथ्वी को खिला देने वाली शक्ति के रूप में चित्रित किया है।
इस कविता में प्रयुक्त 'अम्लान' शब्द विशेष महत्व रखता है। अम्लान का अर्थ है - जो कभी मुरझाए न, जो सदा ताजा और उज्ज्वल रहे। दिनकर ने इसी शब्द के माध्यम से नारी की चिरंतन शक्ति, उसके अविनाशी सौंदर्य और अटूट जीवन-शक्ति को व्यक्त किया है। नारी केवल सृजन की कारक नहीं है, वरन् वह समाज की नींव है। पीढ़ियों के निर्माण में, संस्कृति के संरक्षण में और सभ्यता के विकास में नारी की भूमिका अपरिहार्य है।
दिनकर की इस कविता का संदर्भ भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ा हुआ है। भारतीय समाज में नारी को देवी के रूप में पूजा जाता रहा है, किंतु यथार्थ जीवन में उसे समान अधिकार और सम्मान नहीं मिला। दिनकर की कविता इसी विषमता को चुनौती देती है और नारी की वास्तविक शक्ति को रेखांकित करती है। 'खिली भू' यानी फूली हुई, समृद्ध और सजीव पृथ्वी का निर्माण नारी के बिना संभव नहीं है।
इक्कीसवीं सदी में भी दिनकर की यह कविता प्रासंगिक बनी हुई है। आज जब नारी सशक्तिकरण की बातें होती हैं, तब यह समझना आवश्यक है कि नारी को सशक्त करना नहीं, बल्कि उसकी मौजूदा शक्ति को मान्यता देना और उसे आजाद करना है। दिनकर की यह कविता उसी सत्य को प्रतিपादित करती है। नारी शक्ति अम्लान है, अमर है, और वह किसी भी परिस्थिति में अपनी चमक और प्रभाव को बनाए रखती है।