राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा हो गया है क्योंकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्टालिन का मानना है कि परिसीमन में किए गए बदलाव पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं और इससे छोटे राज्यों के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भाजपा को इस निर्णय के लिए आने वाले समय में महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी।
स्टालिन की इस टिप्पणी का संदर्भ परिसीमन आयोग द्वारा किए गए निर्णयों से है, जिसमें विभिन्न राज्यों के चुनावी क्षेत्रों का पुनर्निधारण किया गया है। तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों को इस प्रक्रिया में नुकसान हुआ है, जिससे राज्य के राजनेताओं में गहरी नाराजगी है। डीएमके नेता स्टालिन ने इस मुद्दे को केंद्रीय सत्ता के दुरुपयोग के संदर्भ में देखा है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी में एक महत्वपूर्ण रोड शो का आयोजन करने जा रहे हैं, जो चल रहे विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने का प्रयास है। कन्याकुमारी जैसे सीमांत क्षेत्रों में भाजपा का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में भारतीय निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनावों को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी तथा निष्पक्ष बनाना है। चुनाव आयोग ने विभिन्न जिलों में अधिकारियों की तैनाती में पुनर्गठन किया है।
दक्षिण भारत में डीएमके की मजबूत राजनीतिक उपस्थिति को देखते हुए, स्टालिन की यह चेतावनी भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले महीनों में परिसीमन विवाद राजनीति का मुख्य विषय बने रहने की संभावना है, और इससे जुड़े विवाद और भी गहरे हो सकते हैं।