कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला संदेश देते हुए परिसीमन प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। थरूर के अनुसार, चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण कदम को तेजी से उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने केंद्रीय सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ गहन विचार-विमर्श करे।
थरूर का तर्क है कि परिसीमन आयोग के निर्णय देश की राजनीतिक संरचना को दीर्घकालीन प्रभावित करते हैं। यह केवल सत्तारूढ़ दल का निर्णय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति और विचार होने चाहिए। वे मानते हैं कि ऐसे फैसलों में बहुदलीय सहमति से ही लोकतंत्र की मजबूती संभव है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकारों को भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए क्योंकि परिसीमन उनके प्रशासनिक ढांचे को सीधे प्रभावित करता है।
थरूर ने यह भी कहा कि जल्दबाजी में परिसीमन कार्य संपन्न करने से विभिन्न हितों में टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। उनका मानना है कि सभी पक्षों से सहमति प्राप्त करके परिसीमन किया जाए तो इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य में विवादों की संभावना कम होगी। थरूर ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत इसकी समावेशी प्रकृति में निहित है।
यह बयान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सार्वजनिक हस्तक्षेप दर्शाता है। परिसीमन आयोग के कार्य को लेकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में मतभेद देश में राजनीतिक तनाव का कारण बन सकता है। थरूर का यह अपील सभी पक्षों को संवादमूलक रास्ते पर चलने की जरूरत को रेखांकित करता है।