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परिसीमन से पहले सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करें: थरूर की प्रधानमंत्री से महत्वपूर्ण अपील

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया से पहले राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों से व्यापक परामर्श करने का आग्रह किया है। थरूर का मानना है कि इस महत्वपूर्ण निर्णय को जल्दबाजी में नहीं लिया जाना चाहिए और इसमें सभी हितधारकों की राय महत्वपूर्ण है।

15 अप्रैल 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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परिसीमन से पहले सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करें: थरूर की प्रधानमंत्री से महत्वपूर्ण अपील

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा है कि संसद की सीमा परिसीमन की प्रक्रिया को किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं निभाया जाना चाहिए। परिसीमन एक संवेदनशील विषय है जो देश की राजनीतिक व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करता है और इसलिए इसमें पारदर्शिता तथा व्यापक परामर्श अत्यंत आवश्यक है।

थरूर ने अपनी अपील में कहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया आरंभ करने से पहले सरकार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से विस्तृत परामर्श लेना चाहिए। इसके अलावा, संबंधित राज्य सरकारों की भी राय ली जानी चाहिए क्योंकि परिसीमन का सीधा प्रभाव स्थानीय राजनीति पर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि यह निर्णय केवल केंद्रीय सत्ता के द्वारा अकेले नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि इसमें सभी पक्षों की सहमति और समझदारी होनी चाहिए।

परिसीमन आयोग का गठन भारतीय चुनाव प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह आयोग संसद की सीटों की संख्या को विभिन्न राज्यों के बीच वितरित करता है। जनसंख्या के आधार पर सीमांकन किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिले। हालांकि, यह प्रक्रिया अक्सर विवादास्पद होती है क्योंकि विभिन्न दल इससे अलग-अलग तरीके से प्रभावित होते हैं।

थरूर का कहना है कि भारत एक बहुलवादी लोकतंत्र है और ऐसे महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी की आवाज सुनी जानी चाहिए। परिसीमन से जुड़े सभी पहलुओं पर खुली चर्चा होनी चाहिए ताकि सभी पक्षों को यह विश्वास हो कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस मुद्दे पर लोकसभा में भी चर्चा हो सकती है क्योंकि परिसीमन का संबंध सीधे तौर पर चुनावों से जुड़ा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल इस बारे में अपने विचार रखना चाहते हैं कि परिसीमन कैसे किया जाना चाहिए। थरूर की अपील एक सकारात्मक कदम है जो सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश करता है।

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