पूर्णिया से भाजपा के सांसद पप्पू यादव एक बार फिर विवादास्पद बयानों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे हैं। महिला आरक्षण नीति और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के मुद्दे पर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसके बाद से विभिन्न महिला संगठनों में आक्रोश की स्थिति बन गई है।
राज्य महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पप्पू यादव को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज नोटिस) जारी किया है। महिला आयोग की ओर से जारी इस नोटिस में उन्हें एक निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने विवादित बयानों के संबंध में लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के संविधानिक अधिकारों और सम्मान के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।
महिला आरक्षण को लेकर दी गई पप्पू यादव की टिप्पणियां महिला सशक्तिकरण की नीति के विरुद्ध मानी जा रही हैं। विभिन्न महिला अधिकार संगठनों ने इन बयानों को लिंग-भेदभावपूर्ण और राष्ट्रीय संविधान की भावना के विरुद्ध बताया है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि के लिए चलाई जा रही पहलों को कमजोर करने वाली इस तरह की टिप्पणियों की जोरदार निंदा की जा रही है।
पप्पू यादव का यह पहली बार नहीं है जब वे विवादास्पद बयानों के कारण सुर्खियों में आए हैं। अतीत में भी उनके विभिन्न बयान विवाद का विषय बने हैं। इस बार के मामले में महिला आयोग की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि संवैधानिक निकाय भी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के प्रति सतर्क हैं। सांसद को अपने बयानों में अधिक जिम्मेदारी बरतनी चाहिए, यह बयान विभिन्न नागरिक समाज संगठनों की ओर से आए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक गलियारों में भी खासा शोरगुल मचा है। विभिन्न राजनीतिक दलों की महिला विंग ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और पप्पू यादव से आधिकारिक माफी मांगी है। महिला आयोग की जांच के नतीजे निकलने तक यह मामला चर्चा का विषय बना रहेगा।