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विधानसभा चुनावों में कोई समझौता नहीं: ईवीएम छेड़छाड़ पर दोबारा मतदान, भारतीय निर्वाचन आयोग की कड़ी चेतावनी

विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की स्थिति में तत्काल दोबारा मतदान का आदेश दिया जाएगा। निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी के विरुद्ध आयोग सख्त कार्रवाई करने का दृढ़ संकल्प दिखा रहा है।

22 अप्रैल 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार संवाददाता0 बार पढ़ा गया
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विधानसभा चुनावों में कोई समझौता नहीं: ईवीएम छेड़छाड़ पर दोबारा मतदान, भारतीय निर्वाचन आयोग की कड़ी चेतावनी

भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आसन्न विधानसभा चुनावों को सुचारु और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों में चुनावी प्रक्रिया की प्रत्येक स्तर पर कड़ी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रावधान है। आयोग का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ रखने के लिए मतदान व्यवस्था में पूर्ण विश्वसनीयता आवश्यक है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा को लेकर ईसीआई विशेष चिंतित है और इस संबंध में सर्वोच्च सावधानी बरते जाने का आदेश दिया है। किसी भी मतदान केंद्र पर यदि ईवीएम में किसी प्रकार की खराबी या संदिग्ध छेड़छाड़ की जानकारी मिलती है तो तुरंत उस केंद्र पर दोबारा मतदान करवाने का निर्णय लिया जाएगा। मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक माना गया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया के किसी भी चरण में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी या अनुचित कार्यवाहियों के विरुद्ध यह कोई सहिष्णुता नहीं दिखाएगा। मतदान के दिन से लेकर मतों की गिनती तक हर कदम पर पर्यवेक्षकों, पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को भी पूरी प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार दिया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

ईसीआई ने सभी स्तरों पर कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया है। मतदान कर्मचारियों को ईवीएम के सही संचालन, विकलांग मतदाताओं की सहायता और चुनावी नियमों की पालना के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। आयोग का विश्वास है कि सुप्रशिक्षित कर्मचारी दल चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बना सकता है। साथ ही, महिला, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों सहित सभी वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

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