नोएडा में श्रमिक वर्ग के बाद अब घरेलू सहायिकाओं ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। इस विरोध प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों ने अपने मालिकों के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है और वेतन में वृद्धि की तत्काल मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके नियोक्ता महीने में लाखों रुपये की कमाई करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता है।
घरेलू कर्मचारियों की स्थिति देश के कई बड़े शहरों में काफी दयनीय है। ये महिलाएं सुबह से शाम तक घरेलू कामों में लगी रहती हैं, खाना बनाना, सफाई करना, बच्चों की देखभाल करना और अन्य कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त वेतन, न्यूनतम सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती है।
प्रदर्शन में शामिल एक महिला ने कहा कि जब मालिक दिन में हजारों रुपये खर्च कर सकते हैं, तब उन्हारी सैलरी बढ़ाने में क्या समस्या है। वह घरेलू सहायिकाओं को न्याय और सम्मान के साथ काम करने का माहौल देने की अपील कर रहीं। इस आंदोलन से यह संदेश दिया जा रहा है कि घरेलू कामकाजी महिलाएं भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और उचित सम्मान तथा पारिश्रमिक की चाहत रखती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कामगारों को श्रम कानूनों के तहत संरक्षण मिलना चाहिए। भारत में लाखों घरेलू कर्मचारी हैं जो अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं और किसी भी कानूनी सुरक्षा से वंचित हैं। इस आंदोलन से यह संदेश जा रहा है कि समाज को इन कर्मचारियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।