बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आने वाला है जब सम्राट चौधरी अपने राजनीतिक करियर के एक नए अध्याय को लेकर आएंगे। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर 1990 में शुरू हुआ था जब वह सक्रिय राजनीति में प्रवेश किए थे। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की नींव राष्ट्रीय जनता दल के साथ रखी और बिहार की राजनीति में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत करने लगे।
सम्राट चौधरी के राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मुकाम 1999 में आया जब राबड़ी देवी की सरकार में उन्हें कृषि मंत्री का दायित्व सौंपा गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बिहार के कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। राजद के साथ उनकी शुरुआती अवधि में उन्हें चुनावी सफलता भी मिली, लेकिन बाद में उन्हें लगातार तीन चुनावों में परास्त होना पड़ा। ये असफलताएं उनके राजनीतिक करियर के लिए चुनौतीपूर्ण समय साबित हुईं।
लेकिन राजनीति की पारंपरिक गलियों में असफलता का सामना करने वाले सम्राट चौधरी ने अपनी रणनीति बदली और भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े। यह निर्णय उनके राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। भाजपा में उनके प्रवेश के बाद मात्र नौ वर्षों में ही उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनने का मार्ग दिखने लगा है। यह उनके राजनीतिक कौशल और जमीनी स्तर पर अपनी कार्यक्षमता को दर्शाता है।
सम्राट चौधरी का यह राजनीतिक सफर बिहार की राजनीति में एक नई गतिविधि लाने वाला है। उनके राजद से भाजपा में आने का निर्णय एक सामरिक राजनीतिक कदम साबित हुआ है जिसने उन्हें प्रदेश के शीर्ष पद की ओर अग्रसर किया है। इस बदलाव से यह स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में नए नेताओं के उदय का दौर आ गया है।