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भारतीय सेना ने बदला ड्रेस कोड, कोलोनियल प्रथाएं खत्म

भारतीय सेना ने अपने ड्रेस कोड में बदलाव किया है। कोलोनियल युग की कई प्रथाओं को समाप्त किया गया है। स्वदेशी तत्वों को शामिल किया गया है और 'रॉयल' शब्द को हटाया गया है।

14 जून 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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भारतीय सेना ने हाल ही में अपने ड्रेस कोड में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। यह बदलाव कोलोनियल युग की कई प्रथाओं को समाप्त करते हुए किया गया है। इस बदलाव की घोषणा सेना के उच्च अधिकारियों द्वारा की गई है। यह निर्णय भारतीय सेना के लिए एक नया अध्याय खोलता है।

बदलाव के तहत, भारतीय सेना ने अपने ड्रेस कोड में स्वदेशी तत्वों को शामिल किया है। इसके साथ ही, 'रॉयल' शब्द को भी हटाया गया है, जो कि कोलोनियल समय का प्रतीक माना जाता था। इस बदलाव का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देना है। यह कदम सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

भारतीय सेना का यह निर्णय उस समय आया है जब देश में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। यह बदलाव भारतीय सेना की छवि को और मजबूत करेगा और इसे अधिक भारतीय बनाएगा। कोलोनियल प्रथाओं को समाप्त करना एक सकारात्मक संकेत है, जो स्वतंत्रता के बाद के भारत की पहचान को दर्शाता है।

सेना के अधिकारियों ने इस बदलाव के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा है कि यह कदम भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह कदम सेना के जवानों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।

इस बदलाव का सीधा असर सेना के जवानों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। जवान अब अपने नए ड्रेस कोड के तहत अधिक आत्मविश्वास के साथ कार्य करेंगे। इससे न केवल उनकी पहचान में बदलाव आएगा, बल्कि यह उन्हें एक नई ऊर्जा भी प्रदान करेगा।

इससे पहले भी भारतीय सेना ने कई बार अपने ड्रेस कोड में बदलाव किए हैं, लेकिन यह बदलाव सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बदलाव भारतीय समाज में एक नई सोच और दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है।

आगे की योजना के तहत, भारतीय सेना इस नए ड्रेस कोड को लागू करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधनों की व्यवस्था करेगी। इसके साथ ही, जवानों को नए ड्रेस कोड के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने की संभावना है।

इस बदलाव का महत्व केवल सेना के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। यह कदम भारतीय संस्कृति को सम्मान देने और कोलोनियल प्रथाओं से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारतीय सेना की पहचान और भी मजबूत होगी, जो कि देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है।

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