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RSS पंजीकरण की मांग को राजनीति बताने पर भागवत का बयान

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक में संघ के पंजीकरण की मांग को राजनीति से प्रेरित बताया। प्रियांक खरगे के आरोपों पर यह प्रतिक्रिया आई है। यह बयान संघ की स्थिति को स्पष्ट करता है।

15 जून 20262 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क4 बार पढ़ा गया
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कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण की मांग को लेकर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने संघ पर आरोप लगाया था कि वह राजनीति में हस्तक्षेप कर रहा है। इस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

भागवत ने कहा कि कर्नाटक में RSS के पंजीकरण की मांग का कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग राजनीतिक दृष्टिकोण से उठाई गई है और इसका संघ के कार्यों से कोई संबंध नहीं है। भागवत के इस बयान ने संघ की स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है।

RSS की स्थापना 1925 में हुई थी और यह संगठन भारतीय संस्कृति और समाज के उत्थान के लिए काम करता है। पिछले कुछ वर्षों में संघ ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कर्नाटक में हाल के चुनावों के दौरान संघ की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए गए थे।

भागवत के बयान के बाद संघ ने यह भी कहा कि वे हमेशा से समाज की सेवा में लगे रहे हैं और राजनीतिक आरोपों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं समझते। संघ का मानना है कि उनकी गतिविधियाँ समाज के उत्थान के लिए हैं, न कि राजनीतिक लाभ के लिए।

इस विवाद का सीधा असर कर्नाटक के राजनीतिक माहौल पर पड़ सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संघ के खिलाफ मोर्चा खोला है, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। आम जनता में भी इस मुद्दे को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।

कर्नाटक में संघ के पंजीकरण की मांग को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक दलों के बीच संवाद और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रह सकता है। इस मुद्दे पर आगामी चुनावों में भी चर्चा होने की संभावना है।

संघ के इस विवाद में भागवत का बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संघ की स्थिति को स्पष्ट करता है। इससे यह भी पता चलता है कि संघ अपने कार्यों को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखता। इस प्रकार के विवादों का समाधान कैसे किया जाएगा, यह भविष्य में महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, कर्नाटक में RSS के पंजीकरण की मांग और इस पर भागवत का बयान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। यह न केवल संघ की छवि को प्रभावित करता है, बल्कि कर्नाटक की राजनीति में भी एक नई दिशा दे सकता है।

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