छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई को हरेली तिहार का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि यंत्रों की पूजा की। यह पर्व विशेष रूप से कृषि से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है और इसे हर साल मनाया जाता है।
हरेली तिहार का आयोजन छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ किया गया। इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों को साफ करके उनकी पूजा करते हैं। यह पर्व फसल की अच्छी पैदावार और कृषि के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।
हरेली तिहार का इतिहास छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से जुड़ा हुआ है। यह पर्व हर साल सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तिथि को मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने खेतों में काम करने के लिए नए उत्साह के साथ आगे बढ़ते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर कहा कि कृषि यंत्रों की पूजा से किसानों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने किसानों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। इस पर्व के माध्यम से कृषि के महत्व को उजागर करने का प्रयास किया गया है।
इस पर्व का लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। किसान अपने यंत्रों की पूजा करके उन्हें नए सिरे से उपयोग करने के लिए तैयार करते हैं। यह पर्व न केवल कृषि के प्रति सम्मान प्रकट करता है, बल्कि समुदाय में एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है।
हरेली तिहार के साथ-साथ अन्य संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। विभिन्न स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम स्थानीय संस्कृति को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
आगे की योजनाओं में इस पर्व को और अधिक व्यापक रूप से मनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने कृषि विकास के लिए नए कार्यक्रमों की घोषणा करने की योजना बनाई है। इससे किसानों को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस प्रकार, हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व न केवल कृषि के प्रति सम्मान प्रकट करता है, बल्कि किसानों के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत भी बनता है। इस उत्सव का आयोजन हर साल किसानों और समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
