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छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार की धूम, पूर्व सीएम बघेल ने की पूजा

छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार धूमधाम से मनाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि यंत्रों की पूजा की। यह पर्व कृषि संस्कृति को समर्पित है।

13 अगस्त 20261 घंटे पहलेस्रोत: शुक्रवार डेस्क2 बार पढ़ा गया
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छत्तीसगढ़ में 28 जुलाई को हरेली तिहार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कृषि यंत्रों की पूजा की। यह पर्व हर साल मनाया जाता है और इसे कृषि संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। हरेली तिहार का आयोजन पूरे राज्य में विभिन्न स्थानों पर किया गया।

हरेली तिहार के दौरान लोग अपने खेतों और कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं। इस दिन विशेष रूप से बैल, हल और अन्य कृषि उपकरणों को सजाया जाता है। लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं। यह पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। यह पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह फसल की बुवाई के समय मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने काम के प्रति समर्पण और मेहनत का जश्न मनाते हैं। हरेली तिहार का आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक धूमधाम से किया जाता है।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कृषि यंत्रों की पूजा से किसानों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कृषि विकास के लिए सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। बघेल ने किसानों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस तरह के आयोजनों से कृषि संस्कृति को बढ़ावा मिलता है।

हरेली तिहार का प्रभाव स्थानीय लोगों पर सकारात्मक होता है। इस दिन लोग एकत्रित होकर अपने खेतों की स्थिति की चर्चा करते हैं। पर्व के दौरान पारिवारिक और सामाजिक बंधन मजबूत होते हैं। यह पर्व किसानों के लिए एक उत्सव की तरह होता है, जिसमें वे अपनी मेहनत का फल मनाते हैं।

हरेली तिहार के साथ-साथ राज्य में अन्य कृषि संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार द्वारा किसानों के लिए विशेष योजनाएं और सहायता प्रदान की जा रही हैं। इस पर्व के माध्यम से कृषि के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसानों को नई तकनीकों और विधियों के बारे में जानकारी मिलती है।

आगे की योजना के तहत, राज्य सरकार कृषि विकास के लिए और अधिक कार्यक्रमों की घोषणा कर सकती है। हरेली तिहार के बाद, किसानों को फसल की बुवाई के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, कृषि यंत्रों की खरीद के लिए सब्सिडी योजनाओं का लाभ भी उठाने का अवसर मिलेगा।

इस प्रकार, हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एकजुटता और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन की पूजा और उत्सव से कृषि के प्रति लोगों का लगाव और बढ़ता है। हरेली तिहार का आयोजन हर साल किसानों के लिए एक नई उम्मीद और उत्साह लेकर आता है।

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