एनसीआर क्षेत्र, कानपुर और लखनऊ सहित विभिन्न शहरों में पुलिस को छकाने में सफल रहे किडनी तस्करी के मास्टरमाइंड रोहित तिवारी को अंततः गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण सफलता है जो मानव अंग तस्करी के इस गंभीर अपराध को उजागर करती है। पुलिस के अनुसार, रोहित तिवारी ने अपने अवैध कारोबार में कई सहयोगियों को शामिल किया था और वह एक समन्वित नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
रोहित तिवारी की गिरफ्तारी से पहले पुलिस को उसकी गतिविधियों पर गहन निगरानी करनी पड़ी थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से अपनी गतिविधियों पर चर्चा किया करता था। एक सुरक्षा बल द्वारा इन कॉल्स को ट्रैक किया गया, जिससे उसके ठिकाने का पता लगाया जा सका और अंततः उसे गिरफ्तार किया गया।
इस नेटवर्क के अनुसार, रोहित तिवारी अपने पीड़ितों को गरीबी और आर्थिक कठिनाई का लाभ उठाकर अवैध रूप से किडनी दान के लिए मजबूर करता था। वह विभिन्न शहरों में अपने सहयोगियों के माध्यम से गरीब और असहाय लोगों को ढूंढता था और उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर अपने अंग दान करने के लिए प्रेरित करता था। हालांकि, पीड़ितों को सही कीमत कभी नहीं मिलती थी और अधिकांश मामलों में उन्हें जटिलताओं का भी सामना करना पड़ता था।
पुलिस की जांच से पता चला है कि रोहित तिवारी के नेटवर्क में चिकित्सक, ब्रोकर और अन्य सहायक शामिल थे जो इस अवैध कारोबार को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उसके पास संपर्कों की एक विस्तृत सूची थी जिसमें संभावित दाता और प्राप्तकर्ता दोनों शामिल थे। यह मामला अंगों की तस्करी की भयानकता को दर्शाता है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी के महत्व को रेखांकित करता है।
प्राधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं और जांच जारी है। इस नेटवर्क को तोड़ने से न केवल सीधे पीड़ितों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में भी मदद मिलेगी।