तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कड़ी आलोचना की है। खरगे ने अपने भाषणों में दावा किया कि प्रधानमंत्री भारतीय संविधान के मूल सिद्धांत समानता में विश्वास नहीं रखते हैं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल की नीतियां न्यायसंगत और समावेशी नहीं हैं, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को असमान व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
खरगे के इन बयानों का उद्देश्य तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ना था, विशेषकर अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा के गठबंधन के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि यह संगठन दलित समाज और अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की पूर्णतः उपेक्षा कर रहा है। खरगे का मानना है कि ऐसी नीतियां सामाजिक न्याय और समानता के विचार को कमजोर करती हैं। उन्होंने तमिलनाडु के मतदाताओं से आह्वान किया कि वे ऐसी ताकतों को सत्ता से दूर रखें जो संविधान के मूल्यों से समझौता करते हैं।
खरगे के विवादास्पद बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में तुरंत प्रतिक्रिया हुई। विरोधी दलों ने इस पर आपत्ति जताई और कांग्रेस के विरुद्ध कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद खरगे ने अपने बयानों को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी को डराना नहीं था, बल्कि संवैधानिक चिंताओं को सार्वजनिक मंच पर लाना था। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से भारतीय लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध रही है।
इस विवाद ने तमिलनाडु चुनावों की राजनीति को और तीव्र बना दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष को सशक्त बनाने के लिए तरह-तरह के तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं। खरगे का यह बयान दक्षिण भारत की राजनीति में केंद्रीय मुद्दों को रेखांकित करता है, जहां सामाजिक न्याय और समान अधिकार वर्षों से मुख्य विषय रहे हैं।