नोएडा में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शन की पड़ताल के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस वार्ता में समिति के सदस्यों ने इस आंदोलन के पीछे की असली वजहें जनता के सामने रखीं और विभिन्न दावों की पुष्टि या खंडन किया।
समिति के अनुसार, आंदोलन को भड़काने में सोशल मीडिया पर फैलाई गई झूठी खबरों और अफवाहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकारी कर्मचारियों की सुविधाओं और वेतन से संबंधित कई भ्रामक सूचनाएं फैलाई गईं, जिससे निजी कंपनियों के कर्मचारी भड़क गए। समिति ने यह भी कहा कि इन अफवाहों का कोई आधार नहीं था, लेकिन इनका असर कर्मचारियों पर गहरा पड़ा।
आंदोलन के दौरान कर्मचारियों द्वारा उठाई गई मांगों की समीक्षा करते हुए समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। कर्मचारियों को बेहतर काम की परिस्थितियां, वेतन में वृद्धि, स्वास्थ्य बीमा सुविधा में सुधार और कार्य घंटों में संशोधन जैसी मांगें शामिल थीं। समिति ने इन मांगों में से अधिकांश को न्यायसंगत माना और उन्हें पूरा करने के लिए सभी हितधारकों को निर्देश दिए हैं।
समिति ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली खबरों की पुष्टि किसी विश्वसनीय स्रोत से करें। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समिति सरकार को सलाह भी देगी। कर्मचारियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए समिति ने कहा कि वह सभी आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उचित समाधान प्रदान करेगी।