महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। परिवहन मंत्री ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि सभी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के संचालकों को स्थानीय यात्रियों से संवाद करने के लिए मराठी भाषा सीखनी आवश्यक है। यह कदम मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में सेवा प्रदान करने वाले हजारों चालकों को प्रभावित करेगा।
सरकार का यह निर्देश स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार, मराठी भाषा का ज्ञान यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संचार को सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रा का अनुभव अधिक सुचारु होगा। मंत्री ने कहा कि यह नीति पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों दोनों के लिए लाभकारी होगी। राज्य में बड़ी संख्या में अन्य राज्यों से आए चालक कार्य करते हैं, जिनमें से कई मराठी भाषा से अपरिचित हैं।
मंत्री ने चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि जो चालक इस निर्देश का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की धमकी के साथ, सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि सभी चालक इस आदेश का पूर्ण रूप से पालन करें। परिवहन विभाग ने चालकों को एक निर्धारित अवधि दी जाएगी, जिसके दौरान वे मराठी भाषा सीख सकें और अपनी दक्षता का प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकें।
इस निर्णय के बारे में विभिन्न मत सामने आए हैं। समर्थकों का मानना है कि यह कदम स्थानीय संस्कृति और भाषा को मजबूत करेगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह पलायन करने वाले लोगों के लिए कठिनाइयां पैदा कर सकता है। विभिन्न टैक्सी संघों ने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। परिवहन मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार इस निर्णय पर अटल है और शीघ्र ही इसे लागू किया जाएगा।
सरकार ने चालकों के लिए विभिन्न मराठी भाषा कार्यक्रम और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना भी बनाई है। इन केंद्रों में चालकों को सामान्य संवाद, दिशा-निर्देश और यात्री सेवा से संबंधित मराठी शब्दावली सिखाई जाएगी। महाराष्ट्र सरकार का यह कदम निश्चित रूप से परिवहन क्षेत्र में एक नई परंपरा स्थापित करेगा।