केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बारातीपुर मस्जिद जैसी घटनाएं बंगाल में दोहराई नहीं जाएंगी और राज्य में सांप्रदायिक सद्भावना बनी रहेगी। उन्होंने माना कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक ऐतिहासिक कार्य है, लेकिन यह अन्य क्षेत्रों में दोहराया जाने योग्य नहीं है।
अपने चुनाव प्रचार भाषण में शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर जोरदार आक्रमण किया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार राज्य में कानून और व्यवस्था को संभालने में विफल रही है। शाह ने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार सांप्रदायिक वोटों को ध्रुवीकृत करने की नीति अपना रही है, जिससे राज्य में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
शाह ने विपक्षी दलों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो दल सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास करते हैं, वे राज्य के विकास में बाधा डालते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी धर्मनिरपेक्ष राजनीति में विश्वास करती है और सभी धर्मों के लोगों के लिए समान विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। शाह की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में चल रहे जातिगत और सांप्रदायिक तनाव को लेकर की गई थी।
इस बयान के माध्यम से भाजपा स्पष्ट संदेश दे रही है कि यदि वह सत्ता में आती है, तो राज्य में सांप्रदायिक सद्भावना और सामाजिक शांति सुनिश्चित करेगी। शाह के इन बयानों से यह भी साफ है कि भाजपा पश्चिम बंगाल चुनावों में सांप्रदायिकता को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रही है। चुनावी प्रचार में इस तरह के बयान भाजपा की रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके जरिए वह सांप्रदायिक समरसता का संदेश देते हुए मतदाताओं को आकर्षित करना चाहती है।